गोरखपुर, 10 सितंबर 2024: पूर्वांचल के युवाओं को नौकर बनने के बजाय मलिक के बनने उद्यमिता प्रारंभ करने के अनेक आयाम तथा विभिन्न उद्यमिता सेक्टर के संदर्भ में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी आफ अगदर नॉर्वे तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की संयुक्त कार्यशाला में विस्तार से विमर्श हुआ। प्रो मोहन कोल्हे नोर्वे के उद्घाटन उद्बोधन में कहा कि एबीवीपी विश्व की सबसे बड़ी छात्र एवं युवा संगठन है और वर्तमान में भारत में 18 वर्ष से 37 वर्ष के 37 करोड़ युवाओं की शक्ति को राष्ट्र शक्ति में बदलने के लिए एबीवीपी निर्णायक भूमिका में है, स्वावलंबन कार्य को बड़े अभियान के तौर पर देशभर में तकनीकी से साथ चलाया जाना विकसित भारत 2047 के परिपेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रो मोहन कोल्हे ने आगे कहा की जमीनी स्तर पर उद्यमी खड़ा कर 37 करोड़ युवाओं को उद्यम से कनेक्ट करने से लगभग 25 लाख करोड़ का इंपोर्ट कम होगा तथा लगभग उतना ही 26 लाख करोड़ के आसपास का एक्सपोर्ट बढ़ सकेगा जिससे भारत विश्व की पहली आर्थिक महाशक्ति बन सकेगी। उर्जा स्वराज के लिए ग्रीन हाइड्रोजन, पीएम सूर्य घर योजना, गोवर्धन योजना, पर्यावरण स्वराज के साथ जलवायु संरक्षण को रेखांकित करते हुए विभिन्न प्रकार की अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को ग्रामीण अंचलों में स्थानांतरित कर छोटे-छोटे उद्यमिता को शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से शुरू करने की कार्यतकनीक बताया गया।
यूजीसी तथा एनआईआरएफ रैंकिंग एवं नैक मूल्यांकन में प्लेसमेंट सेल तथा प्लेसमेंट को के लिए अंक निर्धारित करने पर सवालिया निशान उठाते हुए कुलपति प्रो पूनम टंडन ने कहा कि प्लेसमेंट सेल की जगह “युवा-छात्र स्वावलंबन केंद्र” विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में स्थापित होना चाहिए। भारत में 37 करोड़ बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए इतनी मात्रा में नौकरी नहीं है, युवाओं को नौकरी की मानसिकता से निकालकर उन्हें अपने स्थानीय संसाधन तथा टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर हर_घर_उद्यमी की और सजग और प्रेरित करना होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय स्तर पर एक विशेष रणनीतिक कार्ययोजना पर तत्काल कार्य शुरू किया जायेगा।
कुलपति ने यह भी कहीं कि विश्वविद्यालय से पढ़ने वाले ऐसे छात्र जो कोई दुकान या कोई उद्यमिता या कोई स्वरोजगार का कार्य कर रहा है वह भी एक प्रकार से प्लेसमेंट ही है केवल नौकरी को ही प्लेसमेंट मानना पूर्णत गलत है, इस संदर्भ में उद्यमिता का जैविक पता ही एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता प्रो. विकाश के सिंह, डीन अमरकंटक विश्वविद्यालय ने 64-कलाओं आधारित सांस्कृतिक स्टार्टअप, सोलह सिंगार, हर्बल ब्यूटी – डेकोरेटिव प्रोडक्ट्स फैशन एसेसरीज, 108 जड़ी-बूटी, मोटाअनाज आधारित रेडी टू ईट छप्पन-भोग खानपान उधमिता, 108 भारतीय मसाला, वनौषधि- आयुष स्टार्टअप, ट्रेडिंग, जनजातीय उधमिता, हथकरघा-बुटीक गारमेंट्स, हस्तशिल्प, गोबर, पूजन सामग्री, फूड प्रोसेसिंग, शिल्प एवं हथकरघा, डेयरी, बेकरी, महुआ, जैव उर्वरक, घरेलू / दैनिक उपयोग की वस्तुओं, चमरा – फुटवियर, बायोप्लास्टिक, स्पोर्ट्स आइटम, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक, सेमीकंडक्टर – मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक, नेचुरोपैथी एक्यूप्रेशर, संगीत एवं मनोरंजन उपकरण, 3डी प्रिंटिंग, सौर ऊर्जा, बैटरी इलेक्ट्रिकल वाहन स्टार्टअप सहित अभिरुचि के अनुसार पूर्वांचल के 17 जिला के युवाओं को उद्यम का मालिक बनाये जाने की तकनीक को विस्तार से बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री श्री चंद्रशेखर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि को उद्यमिता से जोड़कर और क्वालिटी प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग के माध्यम से बड़े पैमाने पर ग्रामीण अंचल के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं कृषि उद्यमिता के अवसर से आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। यदि युवा कृषि और उद्यमिता को सही दिशा में जोड़ते हैं, तो वे न केवल अपने क्षेत्र के लिए, बल्कि देश के लिए भी एक नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।
कार्यशाला आयोजन समिति सचिव तथा प्रांत एसएफडी प्रमुख डॉक्टर स्मृति मल ने कार्यशाला के विषय प्रवर्तन किया।
कार्यक्रम का संचालन गोरक्ष प्रांत के प्रदेश मंत्री श्री मयंक राय व आभार ज्ञापन प्रांत अध्यक्ष डॉ राकेश प्रताप सिंह ने किया।
कार्यशाला में देश विदेश के वैज्ञानिक, अकादमिक, शोध छात्र सहित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री घनश्याम शाही आभासी माध्यम से जुड़े थे तथा प्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की विशेष आमंत्रित सदस्य प्रोफेसर उमा श्रीवास्तव, श्री राहुल गोड़ अखिल भारतीय एसएफडी प्रमुख, एग्री विज़न के अखिल भारतीय सह संयोजक श्री अमित सिंह, श्री हरदेव प्रांत संगठन मंत्री , विभाग संगठन मंत्री मानस राय, एग्री विज़न प्रांत प्रमुख शुभम दुबे, प्रांत संयोजक अभिषेक त्रिपाठी, स्वालंबी भारत प्रांत संयोजक राजकुमार, एसएफडी प्रान्त सयोजक निखिल गुप्ता सहित सैकड़ों की संख्या में विश्वविद्यालय के छात्र – छात्राओं ने भाग लिया।

