दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय
जीवन ईश्वर का दिया सबसे अनमोल तोहफा, छात्रों में आत्महत्या जैसा भाव उत्पन्न होना पीड़ादायक: कुलपति
गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग अंतराष्ट्रीय आत्हत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में “आत्महत्या के विमर्श में परिवर्तन” ( Changing the narrative of suicide) विषय पर पैनल चर्चा का आयोजन किया गया
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं कुलपति प्रो पूनम टंडन ने अपने उद्भोधन में कहा कि जीवन ईश्वर का दिया सबसे अनमोल तोहफा है। इससे स्वयं आज के इस दिवस का महत्व विदित है. समाज में छात्र वर्ग के मन में आत्महत्या जैसा भाव उत्पन्न होना पीड़ादायक है। साथ ही यह हमारे लिए एक चुनौती भी है हम इसकी रोकथाम किस प्रकार से करें. विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ के साथ मानसिक स्वास्थ को बेहतर करना हमारा उतरदायित्व है, जिसमे मनोविज्ञान विभाग की भूमिका अहम है. इसी दिशा में विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में स्नेह केंद्र का प्रस्ताव न सिर्फ छात्रों अपितु समाज के हित में एक महत्वपूर्ण पहल होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत कुलगीत एवं माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वल्लन एवं मलायार्पण के साथ हुआ. मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. धनञ्जय कुमार ने मुख्य अतिथि एवं सभी अतिथियों का स्वागत किया .
अधिष्ठाता, छात्र कल्याण प्रो अनुभूति दूबे ने अपने उद्बोधन में पैनल डिस्कशन के विषय पर प्रकाश डाला. प्रो दूबे ने कहा कि आत्महत्या के प्रयास करने वाले व्यक्ति को एक अपराधी माना जाता है , इस प्रकार के ही अनेक कथनों को बदलने की बात कही जा रही , जैसा कि अब भारत में भारतीय न्याय संहिता में अब आत्महत्या को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया है.
विभाग कि पूर्व विभागाध्यक्ष एवं ICSSR फेलो, प्रो. सुषमा पाण्डेय ने आत्महत्या के कारणों पर प्रकाश डालते हुए यह कहा कि अकेलापन एवं अवसाद आत्महत्या का मूल कारण है. भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एस. के. सिंह ने आत्महत्या जैसे व्यवहार के व्यक्ति के मन में तभी उत्पन्न होते हैं जबकि वह स्वयं को समाज से अलग कर , आभार जैसे गुणों की अवहेलना करता है .
पैनल चर्चा के अध्यक्ष के रूप में प्रो. धनञ्जय कुमार ने अंतःविषयक दृष्टिकोण से आत्महत्या की रोकथाम हेतु उपयुक्त रणनीतियों की व्याख्या किया . साथ पैनल के रूप में मनोविज्ञान विभाग के डॉ गिरिजेश कुमार यादव, डॉ रश्मि रानी, डॉ राम कीर्ति सिंह, डॉ प्रियंका गौतम ने ‘आसरा’ एक लघु फिल्म के माध्यम से पैनल चर्चा की शुरुआत करते हुए आत्महत्या के विविध आयामों पर चर्चा किया. पैनल में मुख्य रूप से यह प्रस्तुत किया गया कि हर व्यक्ति के जीवन में अवरोध आते है फिर भी हर वक्ती के जीवन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य होता है एवं सकरात्मक मनोविज्ञान के पहलू जैसे कृत्यज्ञता, आशा, प्रतिस्कंदन , का उपयोग यदि हम दैनिक जीवन में करें तो अवश्य नकारात्मक विचारों से हमारी दूरी बढ़ेगी .
मनोविज्ञान विभाग के तत्वाधान में डॉ विस्मिता पालीवाल एवं डॉ गरिमा सिंह ने इस कार्यकम का सफल आयोजन सम्पन्न कराया . विभाग के सभी छात्रों के साथ ही सेंट जोसफ महिला महाविद्यालय की छात्रों ने भी कार्यक्रम में प्रतिभाग किया .
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