दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज में विशेष कार्यशाला का हुआ आयोजन गोरखपुर।दिग्विजयनाथ पी.जी. कॉलेज के कंप्यूटर विज्ञान विभाग और बीसीए विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा के तकनीकी और वैज्ञानिक योगदान की जानकारी प्रदान करना था, साथ ही विद्यार्थियों को उनके कार्यों और तकनीकी प्रभावों के बारे में जागरूक करना था।
कार्यशाला का शुभारंभ
कार्यशाला का शुभारंभ कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक और विभागाध्यक्ष श्री हरिशंकर गुप्ता द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में भगवान विश्वकर्मा की महत्ता और उनके योगदान के बारे में विस्तार से बताया। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के वास्तुकार और सृजन के देवता के रूप में जाना जाता है, और उनके द्वारा बनाए गए विभिन्न दिव्य संरचनाओं और उपकरणों की चर्चा इस कार्यशाला का मुख्य बिंदु रहा। श्री गुप्ता ने बताया कि विश्वकर्मा जी न केवल पारंपरिक स्थापत्य कला के विशेषज्ञ थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी वैज्ञानिक भी थे, जिन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता से देवताओं के विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और भवनों का निर्माण किया।
तकनीकी चर्चा
इसके बाद बीसीए विभाग की शिक्षक अनुराधा सिंह ने विद्यार्थियों के समक्ष विश्वकर्मा जी के तकनीकी योगदान को आधुनिक युग की तकनीकी प्रगति से जोड़ते हुए अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि भगवान विश्वकर्मा का योगदान केवल प्राचीन काल तक सीमित नहीं है, बल्कि आज की तकनीकी दुनिया में भी उनके विचार और निर्माण विधियों का प्रभाव देखने को मिलता है। अनुराधा सिंह ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि तकनीक केवल मशीनों तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें रचनात्मकता और नवाचार का भी समावेश होता है, जो भगवान विश्वकर्मा के कार्यों में प्रमुखता से देखा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स में भी विश्वकर्मा जी के सिद्धांतों का अनुगमन होता है।
नवाचार और तकनीकी विकास
कार्यशाला में प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित मुदित दुबे ने तकनीकी नवाचार और इसके विकास पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित संरचनाएं और उपकरण आज के वैज्ञानिक युग के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। मुदित दुबे ने छात्रों को उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान विश्वकर्मा ने अद्वितीय संरचनाओं और उपकरणों का निर्माण किया, उसी प्रकार आधुनिक इंजीनियर और वैज्ञानिक भी आज नई-नई खोजों और आविष्कारों के माध्यम से समाज को प्रगति की ओर ले जा रहे हैं। उन्होंने छात्रों को तकनीकी शिक्षा को गंभीरता से लेने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित किया।
व्यावहारिक अनुभव और शिक्षा
कॉलेज के कंप्यूटर विज्ञान
विभाग के शिक्षक कौशल सिंह ने छात्रों को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा के योगदान की महत्ता को समझाते हुए व्यावहारिक जीवन में इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त करना है, बल्कि इसे व्यावहारिक अनुभव के साथ जोड़कर छात्रों को नए-नए अविष्कारों और विकास की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करना है। कौशल सिंह ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की तरह हर छात्र में कुछ नया बनाने और कुछ असाधारण करने की क्षमता होती है, और इसके लिए उन्हें निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।
तकनीकी युग में विश्वकर्मा जी का योगदान
कार्यशाला के दौरान डॉ. सूरज शुक्ला ने विश्वकर्मा जी के तकनीकी योगदान और आधुनिक विज्ञान में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में जिन तकनीकों का उपयोग भगवान विश्वकर्मा द्वारा किया गया था, वे आज के वैज्ञानिक युग में भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा जी ने जिन स्थापनाओं का निर्माण किया, जैसे कि स्वर्ग लोक, पुष्पक विमान और विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्र, वे सभी आज के तकनीकी युग के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। डॉ. शुक्ला ने कहा कि हमें भगवान विश्वकर्मा की तरह तकनीकी नवाचार की दिशा में सोचना चाहिए और इसे समाज के लाभ के लिए उपयोग करना चाहिए।
छात्रों का उत्साह
इस कार्यशाला में कंप्यूटर विज्ञान और बीसीए के छात्रों की भागीदारी उत्साहजनक रही। छात्रों ने भगवान विश्वकर्मा के योगदान के बारे में जानने और उनके तकनीकी विचारों को आधुनिक समय में लागू करने के बारे में गहन चर्चा की। कार्यशाला के दौरान छात्रों ने अपने विचारों और प्रश्नों को भी प्रस्तुत किया, जिनका उत्तर वक्ताओं ने विस्तार से दिया।

इस अवसर पर उपस्थित सभी शिक्षक और छात्रों ने भगवान विश्वकर्मा के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की और उनकी तकनीकी विशेषज्ञता से प्रेरणा लेकर भविष्य में समाज के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यशाला का समापन आभार ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद किया।
उक्त कार्यक्रम की जानकारी डॉ शैलेश कुमार सिंह ,मीडिया प्रभारी ने दी।

