“धर्म और अध्यात्म पर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव” प्रथम संस्करण (IFFRS 2025) : गोरखपुर”
“क्षेत्र के गणमान्य व फिल्मी हस्तियों के साथ हुआ फिल्मोत्सव का शुभारम्भ”
संवाददाता: रोहित श्रीवास्तव एवं शिशिर श्रीवास्तव
गोरखपुर। कहते हैं साहित्य समाज का दर्शन होता है, सो यही बात फिल्मों पर भी लागू होती है। दिनांक 20 मार्च 2025 को योगी राज बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह, रामगढ़ ताल, गोरखपुर में फिल्मी हस्तियों के हाथों दीप प्रज्वलन कर “धर्म और अध्यात्म पर अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव” का शुभारम्भ हुआ। प्रसिद्ध फिल्मी हस्तियों में कश्मीर फाईल फेम विवेक अग्निहोत्री, ’इस रात की सुबह नहीं’ फिल्म की हीरोईन स्मृति मिश्रा, फिल्म डॉन, रेस-2 और खिलाड़ी जैसी मश्हूर फिल्मों के अभिनेता राजेश खट्टर, नामचीन कैमरामैन धरम गुलाटी, नेशनल अवॉर्ड विनर फिल्मकार अरुन शंकर और मराठी फिल्मों के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक पुंडलिक धुमाल समारोह के दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में उपस्थित रहे। गोरखपुर के प्रथम नागरिक माननीय मेयर डॉक्टर मंगलेश श्रीवास्तव ने सभी फिल्मी हस्तियों का दुशाला उढ़ाकर व प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत किया।
विवेक अग्निहोत्री ने अपने सम्भाषण में फिल्मोत्सव की थीम धर्म और अध्यात्म की बड़ी सराहना करते हुए दर्शक श्रेणी में आए छात्रों को धर्म के प्रति प्रेरित किया साथ ही बताया कि वे भी उत्तर प्रदेश के कानपुर (शाहजहांपुर) शहर के आसपास के ही हैं और वे अपने इस उत्तम प्रदेश से खूब बंधे हुए हैं, अपनी मिट्टी से आज भी जुड़े हैं। जब वे बच्चे थे तब अपनी दादी के साथ मंदिर जाया करते थे और दादी रास्ते भर मिलने वाले सभी पत्थरों पर तिलक करती चलती थी, तब उस बच्चे ने अपनी दादी से पूछा कि ऐसा क्यों तब दादी ने बताया था कि कण कण में भगवान विराजता है।
फिल्मोत्सव में आज के दिन की शुरुआत विवेक रंजन अग्निहोत्री की ही मास्टर क्लास से होगा।
इनोगरल फिल्मों में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की आध्यात्मिक पर्यटन पर बनाई फिल्म – शेड्स ऑव यूपी दिखाई गई तो वहीं फिल्म प्रतिस्पर्धा में शामिल फिल्म – ‘वाराणसी – द सिटी ऑव निर्वाणा’ दिखाई गई। यह फिल्म वाराणसी शहर की आध्यात्मिक गहराई का अनुभव करने का निमंत्रण देती है जो सदियों से सभी क्षेत्रों के साधकों के लिए एक प्रकाशस्तंभ रहा है। यह प्रतिबिंब, कनेक्शन और शाश्वत में शांति खोजने की यात्रा है। फिल्म को इस तरह से कैप्चर किया गया है जो सुबह से शाम तक आध्यात्मिक शहर की कहानी बताता है।
इसके अलावा फिल्मोत्सव में जैसा कि होता ही है पूरे दिन 2 और शो में 16 के करीब अन्य छोटी बड़ी फिल्में दिखाई गईं। उत्तर प्रदेश की मिडलेंथ फिल्म “अघोरी” दर्शकों में बड़ी सराही गई। ये एक डॉक्यूमेंट्री है जो उन रहस्यमयी और रहस्यमय साधुओं की दुनिया की गहरी झलक देती है, जिन्हें समाज अजीब, डरावना और अलौकिक मानता है। यह फिल्म अघोर संप्रदाय की परंपराओं, रहन-सहन, साधना, और दर्शन को उजागर करती है, जिन्हें आमतौर पर गलतफहमी और अंधविश्वासों के नजरिए से देखा जाता है।
फेस्टीवल ऑर्गेनाईज़ेशन कमेटी की हेड मिस केतकी कपाड़िया ने मुम्बई से आए सभी फिल्मी हस्तियों का धन्यवाद दिया और बताया कि फेस्टीवल की थीम और गोरक्ष नगरी के चमत्कारी चुम्बकीय प्रभाव ने सभी अतिथियों को इस स्थान पर आने के लिए आकर्षित किया है ऐसा उन्हें लगता है तभी तो उनकी एक ही कॉल पर सभी फिल्मी हस्तियां तुरंत आने को तैयार हुई थीं।
फिल्मोत्सव निदेशक श्रीवास नायडू का कहना है कि इस तीन दिवसीय फिल्मोत्सव में सभी के लिए निःशुल्क प्रवेश है, गोरखपुर के सभी सिनेमा व धर्म और अध्यात्म प्रेमियों को इस अवसर का भरपूर फायदा उठाना चाहिए। बड़ी संख्या में दर्शक आएँ और इन विशेष फिल्मों का आनंद उठाएं।



