ब्यूरो प्रभारी — विनय तिवारी
बडहलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे): बड़हलगंज स्थानीय महाविद्यालय नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में भारतीय वैश्विक परिषद,नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित और राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी विषय- “वर्तमान समय मे भारत-बांग्लादेश सम्बन्ध: चुनौतियों और संभावनाएं” के विदाई सत्र का शुभारम्भ परंपरागत तरीके मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण,दीप प्रज्ज्वलन,सरस्वती वंदना के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण,अंगवस्त्रम् और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। स्वागत भाषण प्राचार्य डॉ. राकेश पांडेय ने दी। मुख्य अतिथि डॉ. राघवेंद्र प्रताप सिंह,लखनऊ विश्वविद्यालय ने कहा भारत और बांग्लादेश के संबंधों का समाधान केवल आर्थिक व्यापार से ही नहीं हो सकता,यद्यपि व्यापर प्रमुख है। सांप्रदायिकता,मानवाधिकारों का उल्लंघन आदि इन समस्याओं का भी समाधान जरूरी है। इनके बीच के संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए व्यापार के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के डॉ. अमित उपाध्याय ने बांग्लादेश के निर्माण और भारत के साथ उसके सम्बन्धों पर विस्तार से प्रकाश डाला। अन्य वक्ता डॉ. महेंद्र सिंह ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषय ‘भारत बांग्लादेश संबंध: चुनौतियां और संभावनाएं’ विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।प्राचार्या,उदित नारायण पडरौना डॉ. ममता मणि ने कहा कि भारत-बांग्लादेश का सम्बन्ध सदैव से साझेदारी और सहयोगी रहा है और भारत इस भूमिका का निर्वहन करता रहेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छपरा विश्वविद्यालय के प्रो.राजेश नायक ने अपने उद्बोधन में कहा कि सांस्कृतिक अस्मिता बांग्लादेश के जन्म का आधार बना। एक छात्र आंदोलन वह था, जिसने बांग्लादेश को जन्म दिया और एक छात्र आंदोलन 2024 का है ,जिसने लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया। इसके पीछे वजह बांग्लादेश का इस्लामीकरण है। यह भारत के लिए चिंता का विषय है। इसके लिए समग्र रणनीति बनाने की जरूरत है।
अन्त में,आभार ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. पूजा नायक ने किया। विदाई सत्र के कार्यक्रम का संचालन डॉ.सुधीर कुमार शुक्ला ने किया।
इससे पहले राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन के प्रथम सत्र (तकनीकी सत्र) का संचालन डॉ त्रिपुरेश कुमार त्रिपाठी ने किया। इस सत्र में अमीषा श्रीवास्तव, हेक्टर टेलीन,देवराज मिश्रा,दीपिका उपाध्याय,उमंग ने ऑफलाइन मोड में शोध पत्रों का वाचन किया। प्रथम सत्र (तकनीकी सत्र) की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अनूप श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में बताया कि किसी राष्ट्र के लिए सबसे जरूरी चीज राष्ट्र की सुरक्षा है और यह राष्ट्रीय हितों पर निर्भर करती है। द्वितीय सत्र (तकनीकी सत्र) में ऑनलाइन मोड में शोधपत्रों का वाचन शिवम पांडेय, डॉ.चंद्रमौली पांडेय, विदुषी, डॉ. सुनीता( ऑफलाइन) ने किया। इस तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ उमाशंकर सिंह ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में भारत बांग्लादेश के संबंधों पर प्रकाश डाला। इस सत्र का संचालन डॉ. अजय मिश्र ने किया।इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी आचार्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं तथा शोधार्थी उपस्थित रहे।
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