गोरखपुर, 13 मई 2025। आज मंगलवार की सुबह गोरखपुर के दक्षिणांचल में अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज से क्षेत्र के लोगों को दहशत में डाल दिया। खजनी, बांसगांव, गोला, धुरियापार, उरुवा और बेलघाट समेत 25-30 किलोमीटर के दायरे में लोगों ने इस तेज आवाज को सुना। बहुत से लोगों का कहना हैं कि ऐसी आवाज को उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था।
लोगों ने बताया कि सुबह 9 बजकर 5 मिनट पर आसमान मे एक जहाज जैसी चीज गुजरी और इसके तुरंत बाद एक तेज धमाके जैसी आवाज हुई। यह आवाज इतनी तेज थी कि सभी लोग भयभीत हो गए और हड़कंप मच गया कि आखिरकार हुआ क्या? , कहां से आई ये तेज आवाज ? लोगबाग एक दूसरे से इस आवाज का कारण जानने की कोशिश करने लगे। सीमा पर तनाव की स्थिति ने लोगों सशंकित कर दिया था। तरह-तरह की अटकलों ने लोगों के भय, चिंता और बेचैनी को और भी बढ़ा दिया था।
आखिरकार जनता की परेशानी और आशंका प्रशासन तक पहुंची और प्रशासन ने तुरंत मामले का संज्ञान लेते हुए जल्द ही यह स्पष्ट कर दिया कि दरअसल यह आवाज भारतीय वायुसेना के रूटीन अभ्यास का हिस्सा थी। फाइटर जेट द्वारा सुपरसोनिक बूम के कारण यह तेज आवाज उत्पन्न हुई। सुपर सोनिक बूम की घटना तब होती है, जब फाइटर प्लेन ध्वनि की गति से तेज गति से चलता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि घबराने की जरूरत नहीं है, यह घटना वायु सेना के एक सामान्य अभ्यास का हिस्सा थी।
प्रशासन के स्पष्टीकरण के बाद लोगों ने राहत की सांस लीं, परंतु सुबह की यह घटना लोगों में चर्चा का विषय बनी रही।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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