खजनी का तकनीकी सहायक बना ‘धनकुबेर’, 25 करोड़ का होटल और 5 करोड़ का आलीशान मकान!
कर्मचारियों से अभद्रता, प्रतिष्ठित चैनल के पत्रकार को धमकाने के भी आरोप
गोरखपुर के विकास खंड खजनी में तैनात एक तकनीकी सहायक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति, कमीशनखोरी और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से इसी ब्लॉक में कार्यरत है और अपने दबंग रवैये के कारण चर्चाओं में बना रहता है।
25 करोड़ का होटल और 5 करोड़ का आलीशान घर
सूत्रों की मानें तो तकनीकी सहायक ने सेवा अवधि में बेहिसाब संपत्ति अर्जित की है। खुद उसके कथन के अनुसार, उसके पास 25 करोड़ रुपये मूल्य का होटल और करीब 5 करोड़ रुपये का मकान मौजूद है। सूत्र बताते हैं कि वह दवाइयों के कारोबार से भी अतिरिक्त आय अर्जित करता है।
कर्मचारी और प्रधान पहलें सें ही परेशान अब खंड विकास अधिकारी सें की अभद्रता
ब्लॉक के कर्मचारियों और कई ग्राम प्रधानों ने बताया कि तकनीकी सहायक का रवैया काफी अभद्र रहता है।प्रधानों का आरोप है कि वह विकास कार्यों में कमीशन की मांग करता है और कार्य न करने पर फाइल रोकने की धमकी देता है। कई कर्मचारियों ने बताया कि वह खंड विकास अधिकारी से भी बदसलूकी करने से नहीं चूकता।
सत्ता के रसूक से रुकवाता ट्रांसफर
ग्राम प्रधानों ने बताया कि उसके खिलाफ जब भी शिकायत होती है, वह अपने राजनीतिक संपर्कों के कारण ट्रांसफर रुकवा लेता है। शिकायत करने वाले कर्मचारियों और प्रधानों पर भी दबाव बनाने की बातें सामने आई हैं।
कमीशन विवाद से शुरू हुआ मामला, महिला ने दी लिखित शिकायत
करीब एक माह पुर्व एक पत्रकार की मां ने तकनीकी सहायक के कथित दबाव और अभद्रता के खिलाफ नोटरी के माध्यम से जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भेजी थी।
आरोप है कि कमीशन न देने पर महिला को परेशान किया गया। इसके बाद पत्रकार ने आरटीआई के माध्यम से उसकी योग्यता और प्रमाणपत्रों की जानकारी मांगी है।
ताजा जानकारी के अनुसार, तकनीकी सहायक ने अपनी गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के लिए कुछ प्रभावशाली लोगों से पत्रकार को फोन कराकर धमकाने की कोशिश की।बताया जा रहा है कि तकनीकी सहायक के खिलाफ पहले भी शिकायतें होती रही हैं, मगर कार्रवाई न होने से वह वर्षों से उसी ब्लॉक में बना हुआ है।
फर्जी मापी कर लाखों रुपये के भुगतान का भी आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि तकनीकी सहायक ने कई विकास कार्यों में फर्जी मापी दिखाकर लाखों रुपये के कार्य केवल कागजों पर ही पूरा बता दिया।
एक ही योजना में 14 से 16 लाख रुपये तक की फर्जी मापी का मामला सामने आया है।
पूर्व सीडीओ ने भी उसकी कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

