गोरखपुर में 30 मरीजों ने कराया मोतियाबिंद का ऑपरेशन, संक्रमण से 9 मरीजों ने गंवाई आंख, हॉस्पिटल सील, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, अखिलेश ने साधा निशाना
यूपी के गोरखपुर के दक्षिणी ग्रामीण इलाके सिकरीगंज के न्यू राजेश हाईटेक हास्पिटल में 19 दिन पहले 30 मरीजों ने बाकायदा कैंप में मोतियाबिंद का आपरेशन कराया था. आपरेशन के 24 घंटे के अंदर ही मरीजों की आंख में संक्रमण हो गया और उनकी हालत बिगड़ने लगी. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए एम्स दिल्ली में इलाज के लिए ले जाया गया. जहां 9 मरीजों की संक्रमण की वजह से आंख निकालनी पड़ी है. गोरखपुर के जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं. डीएम दीपक मीणा और सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि अस्पताल को सील कर दिया गया है. मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट भी एक-दो दिन में आ जाएगी. इस मामलें में अखिलेश ने लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर ट्वीट कर निशाना भी साधा है.
गोरखपुर के सिकरीगंज में न्यू राजेश हाईटेक हास्पिटल में 1 फरवरी को न्यू राजेश कैंप लगा था. गोरखपुर के दक्षिणी ग्रामीण इलाके के अलग-अगल गांव के 30 मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था. उनकी 24 घंटे में ही उनकी हालत बिगड़ने लगी. उनमें से 18 की आंखों में संक्रमण हो गया. हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के सुपर स्पेशलिस्ट अस्पतालों में भर्ती कराया गया. 3 फरवरी को ही जिलाधिकारी दीपक मीणा ने न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल जादोपट्टी सिकरीगंज गोरखपुर में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के दौरान 11 मरीजों के आंख में गंभीर संक्रमण होने पर अपर जिलाधिकारी (नगर) के नेतृत्व में जांच कमेटी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एनएल कुशवाहा, बीआरडी मेडिकल कालेज के नेत्र सर्जन डा. पंकज सोनी और जिला चिकित्सालय के नेत्र सर्जन डा. अंजनी कुमार गुप्ता के नेतृत्व में शामिल कर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए. जांच में गंभीर बैक्टीरीयल इंफेक्शन की बात सामने आने की बात कही जा रही है.
रमेश ने बताया कि उनकी चाची देवराजी देवी की आंख निकाली गई है. वे लोग कार्रवाई कर अस्पताल को सीज करने की मांग करते हैं. इंदाली के रहने वाले संजय सिंह ने अपने पिता का ऑपरेशन कराया था. उनके पिता की आंख में संक्रमण के बाद उनकी एक आंख से ब्लड आने लगा. वे उन्हें बनारस भेजा. खून बंद नहीं होने पर दिल्ली भेजा. उनके घर से दो लोग थे. अर्जुन सिंह और राजेन्द्र सिंह उनके पिता और चाचा है. नागेन्द्र सिंह ने बताया कि अर्जुन उनके भाई हैं. उनकी आंख संक्रमण की वजह से निकालनी पड़ी है. दीपू बारी गांव के रहने वाले हैं. उनकी बड़ी मम्मी का आपरेशन हुआ. आंख में संक्रमण की वजह से गोरखपुर और उनके बाद दिल्ली एम्स में उनकी दो दिन के बाद तीसरे दिन उनकी आंख निकालनी पड़ी. उनकी इलाज आयुष्मान से हुआ था. पुष्पा बारी गांव की रहने वाली हैं. उनके परिजन की आंख भी संक्रमण की वजह से निकालनी पड़ी है.
स्वास्थ्य विभाग की कल्चर रिपोर्ट में संक्रमण की बात सामने आई है. जिन डॉक्टरों ने इनका इलाज किया है, उनके खिलाफ भी मजिस्ट्रेट जांच शुरू हो गई है. न्यू राजेश हॉस्पिटल के नेत्र विभाग को सील कर दिया गया है. मरीजों के बयान दर्ज किए गए हैं. मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट को भी बतौर सबूत जांच में शामिल किया गया है. मजिस्ट्रेट ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर के भी बयान दर्ज किए हैं. मरीजों का कहना है कि ऑपरेशन के दूसरे दिन आंख में दर्द और मवाद आने लगा था.
गोरखपुर के न्यू राजेश हॉस्पिटल के नेत्र विभाग में 1 फरवरी के दिन कुल 30 मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था। 3 से 4 घंटे ऑब्जर्वेशन में रखने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया. इसके बाद 2 फरवरी को अचानक सामने आया कि इन मरीजों की आंखों में इंफेक्शन हो रहा है. 1-1 करके 18 मरीज हॉस्पिटल दोबारा पहुंचे. इनका ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत हुआ था. प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टरों के हाथ पाव फूल गए. मामला बिगड़ता हुआ देखकर इन मरीजों को गोरखपुर के सृजन आई केयर में रेफर किया गया. यहां प्राथमिक जांच के बाद सामने आया कि मरीजों की आंखों में सीवियर इंफेक्शन हुआ है. यहां भी मरीजों का इलाज ठीक से नहीं हो सका. इसके बाद उनके परिजन उन्हें वाराणसी, लखनऊ और एम्स दिल्ली लेकर गए. बताया जा रहा है कि 24 घंटे बाद सामने आया कि अलग-अलग जगह भर्ती 18 मरीजों में से 9 की आंखों की रोशनी चली गई. वहीं, 9 लोगों की आंख निकालनी पड़ी है, क्योंकि इंफेक्शन बढ़ता जा रहा था.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर लिखा उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने लिखा है कि ‘’गोरखपुर में लोगों की आंखों की रोशनी छिन रही है और कोई चैन से बैठा है. मुख्यमंत्री जब गोरखपुर आते हैं तो क्या कोई देखभाल या हिसाब-किताब करते हैं या फिर केवल जोड़-गांठ के चले जाते हैं. मोबाइल याद दिलाता है कि वो स्वास्थ्य मंत्री हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने X पर लिखा ‘’मुख्यनगरी गोरखपुर में लोगों की आंखों की रोशनी छिन रही है और कोई चैन से बैठकर गाल बजा रहा है. मुख्यमंत्री जी जब गोरखपुर आते हैं, तो क्या और कोई भी देखभाल या हिसाब’किताब करते हैं या फिर केवल जोड़-गांठ के चले जाते हैं. इस बार जनता इन्हें गोरखपुर भी हराएगी और बताएगी कि चिराग तले अंधेरा कैसे होता है. रही बात स्वास्थ्य मंत्री जी की तो ये समझ लेना चाहिए कि वो खुद और उनका विभाग ‘हाता नहीं भाता’ की मुख्य-नीति के विस्तार के कारण, उन्हीं की तरह उपेक्षित है. अगले मंत्रिमंडल विस्तार में उनसे विभाग छीनने का आधार बनाया जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय और विभाग की ऐसी दुर्गति देखकर हर कोई ये सहज रूप से स्वीकार भी कर लेगा कि सच में स्वास्थ्य मंत्री महोदय की लापरवाही और कमीशनखोरी की वजह से प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं की इतनी दुर्दशा हुई है. जबकि सच ये है कि उन बेचारों के हाथ में पैसों के हिस्से बांट के अलावा और कुछ अधिकार या दूसरी शक्ति, सामर्थ्य और अख़्तियार नहीं है.’’
गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि सिकरीगंज के एक प्राइवेट अस्पताल में आंख के ऑपरेशन में संक्रमण की बात सामने आई है. पीड़ित मरीजों का अलग-अलग जगह पर इलाज चल रहा है. कुछ मरीजों को गंभीर संक्रमण हुआ है. अस्पताल को सील कर दिया गया है. मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं. एक-दो दिन में उसकी रिपोर्ट भी आ जाएगी. रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई भी की जाएगी और उनका रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल किया जाएगा. उसके लिए भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
इस मामले के संदर्भ में गोरखपुर के सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि फूलों को 4 फरवरी को पता चला कि 1 फरवरी को 30 मरीजों के ऑपरेशन किए गए थे. उन मरीजों में कई लोगों को गंभीर संक्रमण की जानकारी हासिल हुई उसके बाद जिला स्तरीय कमेटी गठित कर जांच बैठाई गई. दिल्ली, वाराणसी समेत गोरखपुर के अलग-अलग अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है. यह दु:खद है कि कई मरीजों की आंख भी निकालनी पड़ी है. 6 फरवरी को वे लोग अस्पताल का निरीक्षण करने गए थे. इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग और उनके द्वारा अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद जांच की गई है. प्रथम दृष्टया मामला संक्रमण का लग रहा है. इसे देखते हुए एहतियात के तौर पर पूरे अस्पताल को सील कर दिया गया है. अन्य ग्रामीण इलाके में स्थित अस्पतालों को संक्रमण रहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं. उनके ऑपरेशन थिएटर और अन्य सर्जिकल स्थानों को भी संक्रमित करने के लिए टीम में लगाई गई है.

