बाढ़ प्रभावित गांव का ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने किया निरीक्षण गोरखपुर। नेपाल द्वारा नदियों में पानी छोड़े जाने से गोरखपुर में भी बाढ़ आने की संभावना को देखते हुए जिला अधिकारी कृष्ण करुणेश जनपद के समस्त एसडीएम और तहसीलदार को निर्देशित किया है कि आपने अपने तहसील अंतर्गत भ्रमणशील रहकर बाढ़ संबंधित ग्राम सभाओं का बराबर निरीक्षण करते रहें जिससे बाढ़ आने की संभावना पर बाढ़ पीड़ितों को राहत शिविर कैंपों में पहुंचाया जा सके जिसके अनुपालन में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर मृणाली अविनाश जोशी अपने तहसील के अंतर्गत सेंदुली वेंदुली गांव का स्थलीय निरीक्षण कर अपने लेखपाल और कानूनगो को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ संभावित गांव पर बराबर निगरानी बनाए रखें जिससे बाढ़ आने की स्थिति पर ग्राम वासियों को राहत शिविर केंद्र पर पहुंचाया जा सके और जिन स्थानों पर नाव की जरूरत हो वहां नाव लगा दी जाएं जिससे ग्राम वासियों को आने-जाने की दिक्कत न होने पाए क्षेत्रीय लेखपाल को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित ग्राम वासियों को राहत सामग्री उपलब्ध करा दिया जाए जिससे खाने के लिए किसी वस्तु की कमी नही हो सके ग्रामवासी को परेशानी न होने पाए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने क्षेत्रीय लेखपाल को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि लेखपाल बराबर गांव में कैंप करें जिससे बाढ़ आने की संभावना से निपटने के लिए तत्काल सहायता किया जा सके।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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