स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में बेहतर अंकों को प्राप्त करने के दृष्टिगत आज 10 चयनित *आत्मनिर्भर वार्ड* के पार्षदगण की उपस्थिति में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में आत्मनिर्भर वार्ड में अपेक्षित सुविधाओ के साथ वार्ड को कचरा शून्य वार्ड के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर चर्चा भी की गई। वार्ड से प्रतिदिवस उत्सर्जित गीले कचरे को होम कम्पोस्टिंग और सामुदायिक कम्पोस्टिंग के द्वारा निपटान की व्यवस्था करने, शतप्रतिशत घरों से कचरा संग्रहण की व्यवस्था के साथ सूखे कचरे को मैटेरियल रिकवरी सेंटर पर भेजने, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों का सौंद्रीकरण के कार्यों को पूर्ण कराने के साथ एक मॉडल वार्ड के रूप में विकसित किया जाना है। इस हेतु चयनित 10 वार्डो में गिरधरगंज, मैत्रीपुरम, सिविल लाइन 1, कल्याणपुर, विकासनगर, राप्तीनगर, बेतियाहाता, कान्हा उपवन नगर, आदि वार्ड शामिल है। कार्यशाला में समस्त अपर नगर आयुक्त, जोनल अधिकारी, नगर स्वास्थ अधिकारी और स्वच्छ भारत मिशन को टीम उपस्थित रही ।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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