प्रेमी युगल ने सरयू में लगाई छलांग, युवक की मौत गोला। थाना क्षेत्र के बारानगर गांव में सरयू घाट पर शनिवार को दोपहर में प्रेमी युगल ने नदी में छलांग लगा दी। जिसमें ग्रामीणों ने युवती को बचा लिया लेकिन युवक डूब गया। ग्रामीणों ने किसी तरह उसका शव बाहर निकाला। खबर लिखे जाने तक इस मामले में कोई तहरीर नहीं पड़ी थी। युवती शव के साथ हॉस्पिटल में कार में बैठी थी।
थाना क्षेत्र के सुरदापार राजा गांव निवासी 19 वर्षीय राजकेश यादव पुत्र सुरेंद्र सुबह नौ बजे से घर से आईटीआई में प्रवेश लेने हेतु बाइक से घर से निकला। दोपहर में उसके पिता को सूचना मिली कि उसका पुत्र सरयू नदी में डूब गया। वे लोग मौके पर पहुंचे तो घाट पर शव पड़ा था। एक युवती भी वहां मौजूद थी। स्वजन युवती को लेकर कार से सरकारी अस्पताल पहुंचे। युवती ने बताया कि वह मृत युवक के बगल के गांव की रहने वाली है। उसका युवक से काफी दिनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आज युवक बंगलौर जाने वाला था इसलिए हम लोग मिलने के लिए घाट पर पहुंचे थे। घाट पर हम लोगों में बातचीत में तय हुआ कि हमारे परिवार के लोग हम लोगो की शादी नहीं होने देंगे इसलिए हम लोग डूब कर मर जाय। सबसे पहले मैं नदी में कूदी, हमको बचाने के लिए युवक भी नदी में कूद गया। हमें ग्रामीणों ने बचा लिया लेकिन वह डूब गया। युवक दो भाइयों में छोटा था। इंटर की परीक्षा पास कर बंगलौर गया था। कुछ दिन पहले इंटर की कंपार्टमेंट परीक्षा देने आया था। आज ही उसकी बंगलौर जाने की ट्रेन थी।
इनसेट –
प्रेमी का शव गोंद में रखकर बिलखती रही प्रेमिका गोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार में अपने प्रेमी का शव गोंद में रखकर घंटों प्रेमिका बिलखती रही। वह लोगों से अपने को जान से मार देने के लिए गुहार लगा रही थी। उसका कहना था कि युवक के मर जाने के बाद अब वह क्या करेगी ? मौके पर युवती के घर का कोई स्वजन नहीं दिखा।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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