पूर्वांचल एक्सप्रेस- वे के लिंक रोड से जुड़ेगा गोरखपुर- सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे
मोतिहारी गोरखपुर- सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे निर्माण में अब नया एलाइमेंट जुड़ गया है। इसके तहत कुशीनगर से गोरखपुर लिंक रोड से आरंभ होने वाली थी, जो अब कुशीनगर से बढ़कर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिंक रोड से जुड़ेगी। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ने के कारण सिलीगुड़ी से दिल्ली या मोतिहारी से दिल्ली जाने वाले गोरखपुर- सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के माध्यम से पूर्वांचल एक्सप्रेस- वे लिंक रोड में जुड़कर सीधे दिल्ली पहुंच जायेंगे। पहले यह सड़क गोरखपुर बाइपास पर खत्म हो रहा था। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पूर्वी चंपारण में 95 किमी सड़क निर्माण होना है। जबकि पश्चिमी चंपारण में बैरिया, नौतन दो अंचल के 23 किमी में 24 गांव होंगे. शिवहर में 16 किमी में 17 गांव शामिल होंगे। सरकार के नये निर्देश के आलोक में विभागीय स्तर पर कार्य आरंभ कर दिया गया है। अगले आदेश के निर्देश में डीपीआर भी बनाया जायेगा 540 किमी गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे में 816 किमी एक्सप्रेस-वे बिहार में है, जिसके आठ जिले शामिल है। जिसमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, किशनगंज, अररिया आदि है। इस एक्सप्रेस-वे में बेतिया व पूर्वी चंपारण के बीच गंडक नदी व कोशीब्रिज पर सबसे बड़ा पुल बनेगा। इसके अलावा बूढ़ीगंडक, बागमती सहित कई छोटी-बड़ी नदियाें पर भी पुल का निर्माण होगा। 540 किमी गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे में 816 किमी एक्सप्रेस-वे बिहार में है। जिसके आठ जिले शामिल है। जिसमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, किशनगंज, अररिया आदि है। इस एक्सप्रेस-वे में बेतिया व पूर्वी चंपारण के बीच गंडक नदी व कोशीब्रिज पर सबसे बड़ा पुल बनेगा। इसके अलावा बूढ़ीगंडक, बागमती सहित कई छोटी-बड़ी नदियाें पर भी पुल का निर्माण होगा। 540 किमी की दूरी में सड़क-पुलिया निर्माण में खर्च होंगे 17 हजार 700 -गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के बीच 16 फ्लाई ओवर का निर्माण होगा।एक्सप्रेस- वे 25 इंटरचेंज सड़क बदलने के लिए बनेंगे, ताकि लोगों काे सुविधा मिले। कुल 31 मेजर ब्रिज होंगे। जिसमें गंडक व कोशी पर बड़ा ब्रिज बनेगा। एक्सप्रेस-वे कई रेल लाइनाें से गुजरेगा, जिसको ले नौ रेल पुल बनाया जायेगा। एनएचआई के अधिकारी अमरेश कुमार ने बताया कि प्रथम सर्वे के अनुसार करीब 17 हजार 700 करोड़ रुपये पुल-पुलिया व सड़क पर खर्च होंगे। यह एक्सप्रेस-वे अब गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे अब यूपी में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिंक रोड से जोड़ा जा रहा है। इससे दिल्ली जाने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी। भूमि अधिग्रहण के लिए सात हजार करोड़ खर्च होंगे।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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