डी.डीए.आर.सी दिव्यांग जनो के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरु करेगा: निदेशक सीआरसी
गोरखपुर।सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय के निर्देश पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण करने निदेशक सीआरसी जितेन्द्र यादव प्रशासनिक अधिकारी ने केन्द्र का बारीकी से निरीक्षक किया कान से दिव्यांग जनो के लिए आडियो मिट्री रुम साउड प्रुफ रुम की आवश्यकता जताई गयी उसके उन्होने मंत्रालय को अवगत कराने को कहा उन्होने बताया कि डीडीआरसी पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपग्रेड केंद्र है जहां दिव्यांग पुनर्वास के लिए सभी सुविधाए उपलब्ध करायी जा रही दिव्यांग जनो के लिए कौशल विकास के लिए मंत्रालय को अवगत कराया जायेगा जिला प्रशासन से सहयोग प्राप्त कर अतिशीघ्र उक्त कार्यक्रम शुरू हो सकेगा
जिलाधिकारी के निर्देश पर पुर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केंद्र पर दिव्यांगता चिन्हांकन शिविर का आयोजन किया जिसमे 30 दिव्यांग जनो का परिक्षण कर उन्हे सहायक उपकरण दिये जाने के लिए चिंहित किया गया उक्त अवसर पर दिव्यांग बालिकाओ को रेडक्रास की तरफ से स्वच्छता कीट निदेशक सी.आर.सी जितेन्द्र यादव ने प्रदान किया उक्त अवसर सचिव रेडक्रास अजय प्रताप सिंह, उमेश किरण, शंकर दयाल, उमेश चौधरी, आदित्य निगम, इमरान एहसान, अयोध्या यादव, गौरव दुबे सहित कई दिव्यांग जन उपस्थित रहे।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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