हर रविवार गोबरहिया में सजती है अंधविश्वास की दुकान.
पांच सौ से दो हजार रुपए तक लेकर दी जाती है एक शीशी पानी. उत्तर प्रदेश, बिहार सीमा पर ईसाई मिशनरियों का बड़ा रैकेट सक्रिय. पड़रौना, कुशीनगर। आज के विज्ञान युग में भी अंध विश्वास फैला कर लोगों को दिग्भ्रमित कर करोड़ों रुपए ऐंठने वाले सक्रिय हैं। ये ठग, लाइलाज बीमारियों को ठीक करने के बहाने काफी धन अर्जित कर रहे हैं। सीमा पर गोबरहिया गांव में हर रविवार सजती है अंध विश्वास की दुकान।
प्राप्त समाचार के अनुसार बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के धनहा थाना क्षेत्रांतर्गत गोबरहिया गांव का राजकुमार नामक एक अनपढ़ युवक इन दिनों गोबरहिया में अंध विश्वास फैला कर धड़ल्ले से धनादोहन का धंधा कर रहा है।बताया जाता है कि सोशल मीडिया के जरिए लाइलाज बीमारियों को ठीक करने का कूट रचित वीडियो बनवा बनवा कर प्रचार करवाता रहता है जिसके चलते दूर दूर से पीड़ित आते हैं। जानकर बताते हैं कि यहां मरीज के नाम से प्रार्थना कर एक शीशी पानी दी जाती है और इसके लिए मरीज से पांच सौ रुपए से लेकर पांच हजार रुपए तक वसूल किया जाता है। मरीज को दो रविवार बुलाया जाता है और तीसरे रविवार बीमारी हट जाने की बात कह कर मरीज को मानसिक संतुष्टि दे दी जाती है। बेचारा मरीज अंधविश्वास के चक्कर में पड़ जाता है उधर उसकी बीमारी बढ़ती चली जाती है और अंत में उसे कीसी बड़े डाक्टर और बड़े अस्पताल जाना पड़ता है, इस प्रकार इसके चक्कर में पड़ कर बहुत लोगो की जान भी चली गई है।
बताया जाता है की इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के विशुनपुरा में भी राजकुमार अंधविश्वास का दुकान लगाया था जहां स्थानीय लोगों ने राजकुमार की पूरी टीम को पीट पीट कर भगा दिया था और स्थानीय थाने में मुकदमा भी दर्ज कराए।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां गोबरहिया में राजकुमार ने एक मंच और आफिस के अलावा टीन शेड बनवाया है जहां उसने बकायदा सेवादार के रूप मे कुछ युवक युवतियों को मासिक वेतन पर रखा है, युवतियों को सेवादार के रूप में रखने के पीछे तरह तरह की बातें समाज में उठती रहती है।सूत्र बताते हैं कि एक दिन लड़कियों के साथ होने वाले व्यवहार का भी भंडाफोड़ होगा।
यहां प्रति रविवार हजारों की संख्या में मरीज और अन्य दुखों से ग्रसित लोग पहुंचते हैं लेकिन किसी का न तो बीमारी ठीक होता है न कोई दुख दूर होता है हां मन को संतुष्ठि मिल जाती है कि अब सब ठीक हो जायेगा, लेकिन होता उल्टा है, मर्ज और समस्या घटती नही बल्कि और ज्यादा प्रभावी हो जाती।
राजकुमार को उसके सेवादार, पास्टर जी बोलते हैं, तथाकथित पास्टर के वहां अपनी बीमारी कराने के लिए लगातार चार रविवार चक्कर काटने वाले पडरौना निवासी एक व्यक्ति का कहना है कि पास्टर के वहां सिर्फ धोखा मिलता है इसके शिवा कुछ नही। हम कंगाल हो गए हैं और बीमारी इतनी बढ़ गई कि एम्स तक जाना पड़ा। इसी प्रकार कथित पास्टर का एक पूर्व सेवादार जो हमेशा इसके साथ रहता था उसका कहना है कि राजकुमार एक ईसाई धर्म गुरु के सानिध्य में है जो हिंदुओ को मानसिक बास कर ईसाई बनने का रास्ता दिखाता है। जबकि इसके परिवार के लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं। ये दूसरों की बीमारी ठीक करने का दावा करता है और उसी आड़ में गरीब लाचार लोगों को लूटता है जबकि खुद अपनी मां और पिता की बीमारी ठीक नही कर पाया और एक के बाद एक उन दोनो का देहांत हो गया।
यहां की भोगौलिक स्थिति ऐसी है की यूपी बिहार का अंतर ही समझ नही आता, पड़रौना से दस किमी की दूरी पर त्रिलोकपुर के बाद ही गोबरहिया है, बिहार के धनहा थाना क्षेत्र में बांसी नदी के किनारे यह गांव है।सूत्र बताते हैं कि कुछ प्रभावशाली लोगों और धनहा थाना प्रभारी के शह पर यह अंध विश्वास की दुकान चल रही है। इसके एवज में धनहा थाना प्रभारी राजकुमार से मोटी रकम का हफ्ता लेते हैं।
उत्तर प्रदेश बिहार के कई जनप्रतिनिधि इसके काले कारनामों को उजागर कर चुके हैं, लेकिन पश्चिमी चंपारण पुलिस का इसको खुला संरक्षण है इसलिए तमाम विरोध के बावजूद इसके कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ता।
दिन दुखी लोगों को ठगने वाला राजकुमार एक समाज सेवी संस्था का पटना से पंजीकरण भी कराया है जिससे कोई सामाजिक या सांस्कृतिक कार्य नही करता बल्कि उसी के आड़ से अपना मंच सजाता और लोगों को बताता कि मेरे यहां सिर्फ नशा मुक्ति का संदेश दिया जाता है, लेकिन यहां खेल कुछ और हो रहा है।
आखिर पश्चिमी चंपारण पुलिस या जिला प्रशासन के लोग इस फर्जीवाड़ा के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करते, उत्तर प्रदेश के किसान नेता पप्पू पांडे, मधुबनी (बिहार) के ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि विजय सिंह, बिहार के ही रघुनाथ पटेल, रामाशंकर तिवारी, उमेश पासवान, रामदरश यादव, प्रभूनाथ यादव, कमलेश कुमार, सुधीर मिश्रा, राकेश चौधरी आदि ने इसके खिलाफ कारवाई की मांग किए हैं। कुछ लोगों का यहां तक कहना है कि यह कार्य समाज विरोधी है इसलिए उच्च स्तरीय मजिस्ट्रियल जांच कराकर इसके और इसके गिरोह में शामिल लोगों पर रासुका लगा कर अंध विश्वास फैलाने वाले गिरोह से समाज को मुक्ति दिलाने का कार्य किया जाना चाहिए।
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