“मारपीट के साथ वकीलों पर पेशाब करने का आरोप, मुकदमा दर्ज”
“स्थानीय पुलिस ने नहीं लिया संयम का सहारा: रत्नाकर”
गोरखपुर। होली के पवित्र और पावन दिवस पर लखनऊ पुलिस के विभूति खंड थाने में अधिवक्ताओं के साथ जो अत्यंत ही अशोभनीय, अमानवीय और निकृष्टतम घटना को अंजाम दिया गया है। वह मानवता के नाम पर कलंक है। अधिवक्ता न्याय की अंतिम धुरी होता है और अगर उसके साथ भी न्याय नहीं होगा तो सामाजिक समरसता का सपना सपना ही रह जाएगा। इस घटना को लेकर आज सिविल कोर्ट गोरखपुर में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रह कर मार्च निकाला और प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
उक्त विचार वरिष्ठ अधिवक्ता तथा सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने आज व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय पुलिस ने ना तो संयम का परिचय दिया और ना ही अपने अधिकारियों को तत्काल सूचना देकर मामले को सुलझाने का प्रयास किया। लखनऊ के विभूति खंड थाने में मामूली से विवाद में होली के दिन एक एसीपी रैंक के अधिकारी द्वारा तीन चार लोगों को मामूली विवाद में पकड़ा गया, अधिवक्ता के परिचय जानने के बाद भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्हें मारा पीटा गया, गालियां दी गई। जानकारी होने पर सौरव वर्मा नाम के वरिष्ठ अधिवक्ता भी वहां पहुंचे। उन्हें भी पुलिस कर्मियों ने वकालत को लेकर घृणित शब्दों का प्रयोग करते हुए मारा पीटा और बकौल सौरभ वर्मा उन पर और अन्य वकीलों पर पुलिस वालों ने पेशाब तक कर दिया। सभ्य समाज के लिए यह घटना निंदा की पराकाष्ठा को भी पार कर जाती है। इस आसुरी आचरण के विरोध में जब अधिवक्ताओं ने एकत्र होकर हंगामा किया, धरना दिया, प्रदर्शन किया, तब रात में 6 घंटे बाद निरीक्षक के साथ 10 पुलिस कर्मियों के खिलाफ मारपीट, बलवा, जान माल की धमकी,लूट,गाली गलौज आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया और इसके बाद पुलिस द्वारा सुनियोजित साजिश के तहत अधिवक्ताओं पर कई मुकदमे दर्ज करते हुए लगभग 100 अधिवक्ताओं को नामजद और डेढ़ सौ के करीब अधिवक्ताओं को अभियुक्त बनाते हुए प्राथमिक की दर्ज की गई, जिसको लेकर अधिवक्ताओं में काफी आक्रोश व्याप्त है। अधिवक्ताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक अधिवक्ताओं पर दर्ज इन मुकदमों को समाप्त नहीं किया जाएगा और दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती है, अधिवक्ता आंदोलन के लिए बाध्य है।

