गोरखपुर | ज्योतिष डेस्क निष्पक्ष टुडे :-
आगामी 19 अप्रैल 2026 तक भारत समेत पूरी दुनिया के खगोल प्रेमी एक ऐसी घटना के गवाह बनने जा रहे हैं, जो अब से पहले आदिमानवों के काल में हुई थी। अंतरिक्ष में घूम रहा एक दुर्लभ धूमकेतु, जिसे Comet C/2025 R3 (Pan-STARRS) नाम दिया गया है, इन दिनों भोर के आकाश में अपनी चमक बिखेर रहा है।
दुर्लभ खगोलीय घटना: 1.7 लाख साल का लंबा इंतजार खत्म
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के प्रसिद्ध खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह धूमकेतु एक ‘दीर्घ-अवधि’ का पिंड है। यह लगभग 1,70,000 साल बाद सौरमंडल के आंतरिक हिस्से में लौटा है। सितंबर 2025 में खोजा गया यह धूमकेतु अब पृथ्वी के इतने करीब है कि इसे कुछ विशेष परिस्थितियों में नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है।
क्या है धूमकेतु और क्यों दिखती है इसकी लंबी पूंछ?
खगोलविद के अनुसार, धूमकेतु मुख्य रूप से बर्फ, धूल और जमी हुई गैसों के विशाल पिंड होते हैं।

कोमा: जब ये सूर्य के करीब आते हैं, तो गर्मी से बर्फ भाप बन जाती है और एक चमकीला बादल बनाती है।
पूंछ: सूर्य की हवाओं के कारण यह गैस और धूल पीछे की ओर एक लंबी पूंछ की तरह फैल जाती है, जिससे यह आकाश में एक शानदार नजारा पेश करता है। इसे वैज्ञानिक ‘डर्टी स्नो बॉल’ भी कहते हैं।
19 अप्रैल को होगा ‘पेरिहेलियन’: सबसे चमकीला और निकटतम रूप
अमर पाल सिंह ने जानकारी दी कि 19 अप्रैल 2026 को यह धूमकेतु अपने ‘उपसौर’ (Perihelion) बिंदु पर होगा। यह वह समय है जब कोई खगोलीय पिंड सूर्य के सबसे निकट होता है। इस दौरान इसकी चमक अपने चरम पर होगी, हालांकि सूर्य की निकटता के कारण इसे देखना चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है।
गोरखपुर में देखने का सही समय और सटीक दिशा
यदि आप इस ‘अंतरिक्ष के मेहमान’ का दीदार करना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
समय: भोर में सुबह 4:30 से 5:30 बजे के बीच।
दिशा: पूर्व और उत्तर-पूर्व (East-North East) दिशा में क्षितिज के पास।

तारामंडल: 18 अप्रैल तक यह पेगासस तारामंडल में दिखेगा, जबकि 19-20 अप्रैल को यह मीन (Pisces) तारामंडल की ओर बढ़ जाएगा।
बेहतर दृश्यता के लिए विशेषज्ञों के सुझाव
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बेहतर अनुभव के लिए कुछ जरूरी टिप्स साझा किए हैं:
स्थान का चुनाव: शहर की चकाचौंध और लाइट पॉल्यूशन से दूर किसी अंधेरी और ऊंची जगह पर जाएं। ग्रामीण इलाके इसके लिए सबसे उपयुक्त हैं।


