दी द उ गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि संस्थान मे गंगा की जैव विविधता के संरक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 18 व 19 अक्टूबर किया जा रहा है जिसका मुख्य विषय “गंगा बायोडायवर्सिटी तथा वेटलैंड कंजर्वेशन” है I कार्यक्रम का उद्घाटन 18 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन द्वारा संवाद भवन मे किया जाएगा I कार्यशाला में नमामि गंगे परियोजना के तहत डॉक्यूमेंट्री प्रस्तुति का भी आयोजन किया गया है I भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की सहायता के साथ नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत ‘गंगा नदी बेसिन में जलीय प्रजातियों के संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के रखरखाव के लिए योजना और प्रबंधनपरियोजना को लागू कर रहा है। कृषि एव प्राकृतिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शरद कुमार मिश्र ने बताया कि गोरखपुर, गंगा नदी की उप-सहायक नदी बेसिन में स्थित एक प्रमुख शहर है, जो राप्ती और रोहिणी नदियों के तट पर स्थित है। गंगा की उप-सहायक नदियों के रूप में ये नदियाँ महत्वपूर्ण जंगली वनस्पतियों और जीवों का पोषण करती हैं, और क्षेत्र की समग्र जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए गंगा की मुख्य धारा के बराबर संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता होती है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को गंगा नदी बेसिन में जैव विविधता संरक्षण के बारे में जागरूक करना है, जिसमें सहायक नदियाँ भी शामिल हैं। इस कार्यशाला में जलीय प्रजातियों की सुरक्षा के महत्व को भी शामिल किया जाएगा और इन महत्वपूर्ण संरक्षण प्रयासों में कार्यरत संस्थानों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला जाएगा। भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा गंगा की जैव विविधता एवं उसके संरक्षण पर व्याख्यान दिए जाएंगे। विश्वविद्यालय के कृषि संस्थान द्वारा वन्य जीव संस्थान, देहरादून के संयोजकत्व मे आयोजित इस कार्यशाला मे 100 से अधिक स्नातकोत्तर कृषि के छात्र व शिक्षक प्रतिभाग करेंगे। विभिन्न सत्रों मे अलग अलग तरह के व्याख्यान होंगे। कार्यशाला के दूसरे दिन कृषि संस्थान के छात्र सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी करेंगे।
प्रो शरद कुमार मिश्र, निदेशक, कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय

