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    Home»धर्म»अर्थ शाइन का खगोल विज्ञान एवं निकट खगोलीय घटना पर एक विशेष लेख।
    धर्म

    अर्थ शाइन का खगोल विज्ञान एवं निकट खगोलीय घटना पर एक विशेष लेख।

    Anurag TripathiBy Anurag TripathiFebruary 19, 2026Updated:February 19, 2026No Comments8 Mins Read
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    ज्योतिष डेस्क निष्पक्ष टुडे ;-

    आकाश में अद्भुत संगम: 20 फरवरी 2026 को चंद्रमा और शनि ग्रह होंगे एक ही राइट एसेन्शन (समकोण आरोहण) पर । घटित होगा युति का दृश्य। और देख सकते हैं अर्थशाइन भी।

    खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार “इस युति के दौरान चंद्रमा और शनि ग्रह एक ही राइट एसेन्शन (समकोण आरोहण) साझा करेंगे। चंद्रमा, शनि के लगभग 4°38′ उत्तर से गुज़रेगा। उस समय चंद्रमा शुक्ल पक्ष का बढ़ता अर्धचंद्र होगा, जो लगभग 10% प्रकाशित और 3 दिन पुराना रहेगा। यह दृश्य संध्या आकाश में अत्यंत आकर्षक लगेगा।”

    खगोल-प्रेमियों के लिए 20 फरवरी 2026 की संध्या एक खास नज़ारा लेकर आएगी। इस दिन आकाश में चंद्रमा और शनि युति (Conjunction) की स्थिति में दिखाई देंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय गणनाओं के अनुसार, दोनों पिंड एक ही राइट एसेन्शन (समकोण आरोहण) साझा करेंगे, जबकि चंद्रमा शनि के लगभग 4°38′ उत्तर से गुज़रेगा। और इस अवसर पर चंद्रमा शुक्ल पक्ष का बढ़ता अर्धचंद्र होगा, जो लगभग 10% प्रकाशित और 3 दिन पुराना रहेगा। यह अवस्था शाम के आसमान में एक पतली, आकर्षक चंद्र-कला प्रस्तुत करेगी।
    कब और कैसे दिखेगा दृश्य।

    खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया इस दौरान चंद्रमा और शनि एक ही (राइट एसेन्शन) समकोण आरोहण (Right Ascension) पर होंगे और इस दौरान चंद्रमा, शनि के 4°38′ उत्तर से गुज़रेगा। उस समय चंद्रमा 3 दिन पुराना (शुक्ल पक्ष का प्रारम्भिक चरण) होगा। या कुछ यूं कहें कि शुक्ल पक्ष का बढ़ता अर्धचंद्र (10% प्रकाशित), 3 दिन पुराना ही होगा। यह युग्म लगभग 18:23 (IST) पर दिखाई देना शुरू होगा। उस समय दोनों पिंड पश्चिमी क्षितिज से लगभग 20 डिग्री ऊपर होंगे, जब संध्या धीरे-धीरे अंधकार में बदल रही होगी। इसके बाद दोनों खगोलीय पिंड भी क्षितिज की ओर नीचे जाते हुए, सूर्यास्त के 2 घंटे 7 मिनट बाद, यानी लगभग 19:58 (IST) पर अस्त हो जाएंगे। दृश्यता के दौरान चंद्रमा की चमक का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 9.9 और शनि की मैग्नीट्यूड 1.0 होगा।एवं दोनों खगोलीय पिंड, मीन (Pisces) तारामंडल में स्थित रहेंगे। साथ ही दोनों के बीच कोणीय दूरी अधिक होने के कारण यह दृश्य एक ही दूरबीन (टेलीस्कोप) के दृश्य-क्षेत्र में साथ नहीं समाएगा। फिर भी, इन्हें नंगी ( साधारण) आँखों या द्विनेत्री (बाइनोक्युलर) से आसानी से देखा जा सकेगा।

    निकटतम पहुँच के समय, चंद्रमा और शनि के बीच कोणीय दूरी के ग्राफ को समझाते हुए खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि युति के क्षण पर खगोलीय पिंडों की स्थिति कुछ यूं होगी कि उस दौरान एक पिंड चंद्रमा का राइट एसेन्शन: 00h 04m 30s तथा डिक्लिनेशन: 2°47′ उत्तर में और यह मीन (Pisces) तारामंडल में होगा एवं चमक का मैग्नीट्यूड (Magnitude) −9.9 के साथ ही कोणीय आकार: 31′ 44.7″ होगा अब दूसरे खगोलीय
    पिंड शनि की बात करें तो पाते हैं कि इसका राइट एसेन्शन: 00h 04m 30s एवं डिक्लिनेशन: 1°50′ दक्षिण तथा यह भी उस दौरान मीन (Pisces) तारामंडल में ही स्थिति होगा और इसकी चमक का मैग्नीट्यूड (Magnitude) 1.0 होगा एवं
    कोणीय आकार: 16.0″ होगा।

    अवलोकन के लिए कुछ सुझाव।
    खगोलविद अमर पाल सिंह ने उल्लेख किया है कि कोणीय दूरी अधिक होने के कारण ये एक टेलीस्कोप के दृश्य-क्षेत्र (FOV) में नहीं आएंगे, लेकिन यहाँ कुछ चीजें हैं जो आप प्रयोग कर सकते हैं जैसे कि किसी भी विशेष बाइनोक्युलर्स एवम् टेलीस्कोप का उपयोग , या यूं कहें कि एक 10×50 का बाइनोक्युलर इस दृश्य के लिए अलग अलग देखने के लिए अच्छा रहेगा। इसमें आप शनि के फीके पीले रंग और चंद्रमा के प्रकाशित हिस्से के साथ-साथ ‘अर्थशाइन’ (Earthshine) भी देख सकते हैं।

    क्यों और कब दिखाई देगा अर्थशाइन। और क्या होता है अर्थशाइन’ (Earthshine)।

    खगोलविद अमर पाल सिंह ने अर्थशाइन’ (Earthshine) का संक्षिप्त खगोलीय परिचय देते हुए बताया कि अर्थशाइन’ (Earthshine) को पहली बार देखना किसी भी खगोल-प्रेमी के लिए एक जादुई अनुभव जैसा होता है, और 20 फरवरी 2026 की रात इसके लिए भी बिल्कुल सटीक है। अर्थशाइन और उसकी स्थिति के बारे में खगोलविद अमर पाल सिंह ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि अर्थशाइन (Earthshine) को खगोलविज्ञान में बड़ा महत्वपूर्ण माना गया है। और इसके पीछे रोचक खगोल विज्ञान भी मौजूद है। इसीलिए खगोल वैज्ञानिकों द्वारा इसको अक्सर ” *पुराने चंद्रमा की गोद में नया चंद्रमा” (The old moon in the new moon’s arms) कहा जाता है।* खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो सामान्यतः हम चंद्रमा का वही हिस्सा देखते हैं जिस पर सूर्य की सीधी रोशनी पड़ती है। लेकिन अर्थशाइन के दौरान, चंद्रमा का वह अंधेरा हिस्सा भी हल्का चमकता हुआ दिखाई देता है जिस पर सूर्य की सीधी रोशनी नहीं पड़ रही होती। यह चमक इसलिए होती है क्योंकि पृथ्वी, सूर्य की रोशनी को अंतरिक्ष में परावर्तित (Reflect) करती है, और वही परावर्तित रोशनी चंद्रमा के अंधेरे हिस्से पर पड़ती है। चूंकि पृथ्वी, चंद्रमा से कहीं अधिक बड़ी और चमकदार (बादलों और बर्फ के कारण) है, इसलिए यह “पृथ्वी की चमक” या अर्थशाइन, चंद्रमा के अंधेरे हिस्से को हल्का रोशन कर देती है और यह आकर्षक खगोलीय नज़ारा 20 फरवरी 2026 को भी साफ़ दिखाई देगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अर्थशाइन को देखने का सबसे अच्छा समय तब होता है जब चंद्रमा का 1% से 15% हिस्सा प्रकाशित हो। लेकिन 10% प्रकाश के साथ, चंद्रमा की अपनी चमक इतनी अधिक नहीं होगी कि वह अर्थशाइन को धुंधला कर दे। क्योंकि इस दौरान चंद्रमा की उम्र (3 दिन) के क़रीब होगी, और वैक्सिंग क्रेसेंट (शुक्ल पक्ष का बढ़ता अर्धचंद्र) के शुरुआती 3-4 दिनों में अर्थशाइन सबसे स्पष्ट दिखाई देती है। चूंकि 20 फरवरी को चंद्रमा, सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे तक आकाश में रहेगा, इसीलिए आपके पास इसे देखने का पर्याप्त समय होगा।

    इसे कैसे देखें?

    खगोलविद अमर पाल सिंह ने अवलोकन गाइड के प्रकार को समझाते हुए बताया कि रात्रि के आकाश में 18:23 (IST) के आसपास जब आप पश्चिम की ओर देखेंगे, तो इसे देखने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाएं, जैसे (साधारण) आँखों से देखना चाहते हैं तब, जैसे-जैसे गोधूलि (Twilight) कम होगी, आप देखेंगे कि पतले चमकीले अर्धचंद्र के साथ चंद्रमा का बाकी गोल हिस्सा भी एक बहुत ही धुंधली,धूसर (gray) भूरी-नीली चमक के साथ दिखाई दे रहा है। लेकिन आज कल *कृत्रिम प्रकाश प्रदूषण* की अधिकता के कारण कई जगहों से इसको तो साधारण आंखों से देखना थोड़ा सा मुश्किल भी हो सकता है, लेकिन दूसरी बात यह है कि यदि आपके पास कोई भी छोटी बाइनोक्युलर्स (Binoculars) है तब उसका भी उपयोग कर सकते हैं जोकि एक अच्छा तरीका है। बाइनोक्युलर्स के माध्यम से अर्थशाइन में चंद्रमा के “अंधेरे” हिस्से पर स्थित बड़े क्रेटर और ‘मारिया’ (चंद्र सागर) भी स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। और यदि आपके पास कोई न्यूटोनियन टेलीस्कोप (200mm f/5.5) मौजूद है तब कम पावर वाले आईपीस (जैसे 25mm या 30mm) का उपयोग करें ताकि पूरा चंद्रमा दृश्य-क्षेत्र में आ सके। आपको चंद्रमा के प्रकाशित किनारे और अर्थशाइन वाले हिस्से के बीच का ‘टर्मिनेटर’ (विभाजक रेखा) भी बहुत ही सुंदर दिखेगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने एक रोचक तथ्य “दा विंची ग्लो” (The Da Vinci Glow) के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस (अर्थशाइन) को ही (The Da Vinci Glow)”दा विंची ग्लो” भी कहा जाता है। क्योंकि अर्थशाइन की व्याख्या सबसे पहले 16वीं शताब्दी में लियोनार्डो दा विंची ने की थी, इसीलिए इसे कभी-कभी ‘दा विंची ग्लो’ भी कहा जाता है। साथ ही उस रात शनि ग्रह (Saturn) भी चंद्रमा के करीब होगा, जिससे यह दृश्य और भी शानदार हो जाएगा। शनि का पीलापन और चंद्रमा की यह हल्की धूसर (gray) नीली-भूरी चमक एक अद्भुत (कंट्रास्ट) चमक पैदा करेगी।

    खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा लगभग 10% प्रकाशित है, इसलिए यह बहुत ज्यादा चमकीला नहीं होगा। यह अर्थशाइन की फोटोग्राफी के लिए सबसे अच्छा समय है इसीलिए साथ ही फोटोग्राफी भी कर सकते हैं, यदि आप एस्ट्रोफोटोग्राफी करते हैं, तो 50mm से 100mm के लेंस के साथ एक वाइड-एंगल शॉट में इन दोनों के साथ मीन तारामंडल के तारों को भी कैद किया जा सकता है।

    खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष टिप्पणी के तौर पर बताया कि अगर आज कल आप शनि ग्रह के शानदार छल्लों को दूरबीन से देखने का ख़्याल कर रहे हैं तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आज कल शनि के छल्ले इस समय पृथ्वी के सापेक्ष बहुत ही कम कोण पर (edge-on) होंगे, जिससे वे टेलीस्कोप में एक पतली रेखा की तरह ही दिखाई दे सकते हैं, साथ ही 20 फरवरी 2026 को आसमान में सजी यह खगोलीय जुगलबंदी देखना न भूलें, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि “यदि मौसम साफ रहा, तो यह युति विद्यार्थियों, शौकिया आकाश-निरीक्षकों और आम लोगों के लिए एक शानदार अनुभव होगी। लेकिन *प्रकाश-प्रदूषण से दूर स्थान पर जाकर देखने से दृश्य और भी स्पष्ट होगा* तभी यह शानदार खगोलीय घटना,खगोल-प्रेमियों के लिए एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करेगा।

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