निष्पक्ष टुडे /एक्सक्लूसिव ;-
आयात, रिफाइनिंग, बॉटलिंग और डिलीवरी की लंबी प्रक्रिया के बाद घर तक पहुंचता है गैस सिलेंडर! !
भारत में हर घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाला LPG सिलेंडर एक लंबी और जटिल प्रक्रिया के बाद उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। यह सफर विदेशों से गैस आयात होने से शुरू होकर बॉटलिंग प्लांट, गैस एजेंसी और अंततः उपभोक्ता के घर तक पहुंचने तक चलता है।
आयात पर निर्भरता ;-

भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है।
यह गैस मुख्य रूप से कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से बड़े जहाजों के माध्यम से देश के प्रमुख बंदरगाहों पर पहुंचती है।
रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग ;-

देश में मौजूद रिफाइनरियों में कच्चे तेल से भी LPG तैयार की जाती है।
आयातित और घरेलू दोनों तरह की गैस को प्रोसेस कर सुरक्षित रूप से स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है।
बॉटलिंग प्लांट की भूमिका;-
प्रोसेसिंग के बाद गैस को बॉटलिंग प्लांट भेजा जाता है, जहां खाली सिलेंडरों में 14.2 किलोग्राम गैस भरी जाती है।
हर सिलेंडर की सख्त सुरक्षा जांच और वजन मापने के बाद उसे सील किया जाता है।
डिस्ट्रिब्यूटर नेटवर्क ;-
भरे हुए सिलेंडरों को ट्रकों के माध्यम से स्थानीय गैस एजेंसियों तक पहुंचाया जाता है।
गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं के ऑर्डर के अनुसार सिलेंडरों की सप्लाई सुनिश्चित करती हैं।
घर तक डिलीवरी ;-
गैस एजेंसी के डिलीवरी कर्मी सिलेंडर को उपभोक्ता के घर तक पहुंचाते हैं।
इसके लिए कंपनी एजेंसी को प्रति सिलेंडर लगभग ₹70 से ₹75 का कमीशन देती है, जिसमें से डिलीवरी कर्मियों को औसतन ₹15 से ₹30 प्रति सिलेंडर का भुगतान किया जाता है।
कीमत निर्धारण कैसे होता है.

घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें शामिल हैं:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत
आयात और परिवहन लागत
टैक्स और ड्यूटी
बॉटलिंग और वितरण खर्च
इसी कारण अलग-अलग शहरों में गैस सिलेंडर की कीमत में अंतर देखने को मिलता है।
फैक्ट बॉक्स: LPG सिलेंडर एक नजर में ;-

वजन: 14.2 किलोग्राम (घरेलू)
आयात निर्भरता: 50–60%
एजेंसी कमीशन: ₹70–₹75 प्रति सिलेंडर
डिलीवरी भुगतान: ₹15–₹30 प्रति सिलेंडर
प्रमुख कंपनियां: इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम
निष्कर्ष ;-


