“सरयू तट वार्ड नं 18 को ही बना दिया गया कूड़ा डंपिंग जोन “
“दुर्गंध व प्रदूषण से लोगों की बढ़ी दुश्वारियां”
गोला। एक तरफ जहां जल संचय व नदियों को बचाने के लिए सरकार मुहिम चला रही है तो वहीं दूसरी तरफ नदियों में कूड़ा कचरा फेंके जाने के कारण नदियों का जल दूषित हो रहा है। हालात यह है कि नदियों में जगह-जगह कचरों का अंबार लगने से इसमें से निकलने वाली दूषित गैस एवं हानिकारक तत्व जल को प्रभावित कर रहा है और नदियों से सिंचाई का साधन होने से यह फसल को भी प्रभावित कर रहा है।
मालूम हो कि छोटी अयोध्या के नाम से प्रसिद्ध उपनगर गोला से गुजरने वाली मां सरयू नदी के किनारे नगर पंचायत और लोगों द्वारा घरों का गंदा कूड़ा गिराया जा रहा है और इस कूड़ा की वजह से सरयू नदी के किनारे कूड़ा डंपिंग जोन बन गए हैं। और हालात यह है कि नगर में यदि आप देखेंगे तो अनेकों जगहों पर गंदगी और कूड़े का अंबार दिखाई देगा ऐसे में नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े़ होना लाजिमी है।
सरयू नदी के तट पर भी कूड़े के ढ़ेर लगे हैं। इन दिनों सीधे सरयू नदी के तट पर यह किया जा रहा है। नगर पंचायत द्वारा खुलेआम कूड़ा डाला जा रहा है। सरयू घाट स्थित वार्ड नं 05 और 18 शहीद स्थान बिसरा रोड नदी किनारे कचरा निस्तारण और उसमें लगाई गयी आग से उठने वाले धुओं के कारण अगल-बगल बसे और उस रास्ते गुजरने वाले लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार इन सबसे बेपरवाह होकर दिन रात कस्बे के कचड़ा को सरयू नदी में धकेलने में लगे हैं। इसकी बानगी नपं गोला के सहीद स्थान, बिसरा रोड,गोला-उरूवा मार्ग के कोल्ड स्टोर के सामने,बेवरी श्याम घाट,वार्ड 03 और 17 स्थित पक्का घाट,राम बाग,वार्ड नं 06 चिकनियां आदि अन्य सार्वजनिक जगहों पर देखी जा सकती है।
नमामि गंगा अभियान संचालित होेने के बाद भी ऐसा हाल है। सरयू नदी के किनारे बिखरा कूड़ा नदी की सुंदरता को दाग लगा रहा है। बिखरे कूड़े के ढेर पर लावारिस जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे दुर्गंध और प्रदूषण फैल रहा है।
सरयू नदी के किनारे कूडे़ के ढेर व प्रदूषण मुक्त करने के लिए किसी तरह का कोई प्रयास नगर पंचायत व जनप्रतिनिधियों के द्वारा नहीं किया जाना चिंता का विषय है। नदियों के दूषित जल में आक्सीजन की कमी हो जाती है जिसके कारण यह जलीय जीवों के साथ-साथ जैव विविधता के लिए भी अत्यधिक घातक सिद्ध होता है। इसमें उपस्थित विभिन्न औद्यौगिक रासायन सिंचाई के माध्यम से कृषि भूमि की उर्वरा क्षमता को भी घटा देते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या रुख अख्तियार करती है।
“लोगों ने किया विरोध,फिर भी कार्यवाई नहीं”

