मिल्कीपुर उपचुनाव जीतने के लिए समुद्र मंथन मे लगी भाजपा, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जीतने वाले घोड़े की कर रहा तलाश,
टिकट कटने पर बसपा की ओर भाग सकता है भाजपा का एक दावेदार,
सपा मे भी टिकट की दावेदारी को लेकर मचा है घमासान, अयोध्या।
मिल्कीपुर विधानसभा सुरक्षित सीट पर उपचुनाव होना है । फिलहाल अभी चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है। फिर भी राजनैतिक दल शतरंज की गोटियां बैठाने मे लगे हैं। संसदीय चुनाव हारने के बाद भाजपा मिल्कीपुर विधानसभा की सीट पर अपना परचम लहराने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। वैसे भाजपा की जीत तभी सम्भव है जब भाजपा एक ऐसा प्रत्याशी मैदान मे उतारे जो सर्वमान्य हो। जिसे मिल्कीपुर के मतदाता स्वीकार करें। वैसे भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मंथन मे लगा है कि कौन सा घोड़ा मिल्कीपुर की रेस जीत सकता है। नए चेहरे पर दांव लगाया जाय या फिर पुराने घोड़े पर दांव लगाया जाय। वैसे मिल्कीपुर के मतदाता मिल्कीपुर क्षेत्र से बाहर हटकर लाए गए किसी भी प्रत्याशी को शायद स्वीकार करने से गुरेज करें। भाजपा नेतृत्व को इस बिन्दु पर भी विचार करना होगा।
यह उपचुनाव यहां विधायक रहे अवधेश प्रसाद के सांसद निर्वाचित होने की वजह से कराया जाना है। तीन राज्यों के चुनाव के साथ प्रदेश के 10 विधान सभा क्षेत्रों मे उपचुनाव होना है। उससे पहले मिल्कीपुर तहसील में फेर बदल की भी अटकलें भी शुरू है। वजह लोकसभा चुनाव में पार्टी के अंदर आपसी गुटबाजी भाजपा के लिए घातक साबित हुई। उपचुनाव की घोषणा से पहले तहसील के अधिकारियों में परिवर्तन तय माना जा रहा है। उपचुनाव के लिए अभी राजनैतिक दलों को उम्मीदवार घोषित करना बाकी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने भाजपा प्रत्याशी गोरखनाथ बाबा को पराजित किया था। अब देखना है कि भारतीय जनता पार्टी पुराने चेहरे गोरखनाथ बाबा को उम्मीदवार बनाएगी या कोई नया चेहरा सामने उतारेगी। विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा से टिकट के कई दावेदार है। जिनमें पूर्व विधायक रामू प्रियदर्शी, नीरज कनौजिया, भाजपा के जिला महामंत्री राधेश्याम त्यागी, चंद्रभानु पासवान,पूर्व प्रमुख विनय रावत, चंद्रकेश रावत आदि नामों की चर्चा है। मिल्कीपुर विधानसभा सीट की जनता को नये चेहरे की तलाश है। फिर भी पार्टी में आपसी सामंजस्य न होना भाजपा के लिए घातक साबित हो सकता है। मिल्कीपुर उप चुनाव मे भाजपा व सपा के बीच सीधी टक्कर है। किन्तु भाजपा मे टिकट को लेकर मारामारी है तो सपा मे भी टिकट को लेकर बगावत कम नहीं है। सपा वैसे तो सांसद अवधेश प्रसाद के पुत्र अजित प्रसाद को मैदान मे उतारने का मन बना चुकी है। किन्तु सपा को आखिर मे यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है। ऐसे मे सपा को भीतर घात झेलना पड़ सकता है। भाजपा ने अबतक लोक सभा चुनाव मे जयचंद की भूमिका मे रहे जयचंदों पर कोई कारवाई नहीं की है और शायद विधानसभा के उप चुनाव तक कार्रवाई स्थगित रहे। किन्तु चुनाव बाद जयचंदो पर तलवार चल सकती है। जानकार सूत्रों की माने तो भाजपा मे टिकट न मिलने पर एक दावेदार बसपा का दामन थाम सकता है।
वही दूसरी ओर सपा के सासंद अवधेश प्रसाद के बेटे के टिकट को लेकर पार्टी में बगावत जारी है। जो सपा का खेल बिगाड़ सकती है। जानकार सूत्रों का कहना है कि सपा को अभी भाजपा का पत्ता खुलने का इंतजार है। सपा अंतिम समय मे उम्मीदवार बदल कर सबको चौंका भी सकती है।
