पत्नी-पति का एक दुसरे के प्रति सम्मान होना जरुरी -सदगुरु. बडहलगंज/गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे) मातेश्वरी परिवार द्वारा विश्व कल्याण के लिए आयोजित आदि शक्ति अखंड महायज्ञ के छठवें दिन ध्यान योग प्रवचन शिविर में सदगुरु महराज ने उपदेश देते हुए कहा कि देवता के बिना देवी और देवी के बिना देवता अधूरे हैं। ठीक उसी प्रकार मानव योनि में पति के बिना पत्नी व पत्नी के बिना पति अधूरा होता है।
पुरुष व स्त्री एक दूसरे के पूरक होते है दोनो का एक दूसरे के प्रति सम्मान व कर्तव्य होता है और उन कर्तब्यो का निर्वहन दोनो की जिम्मेदारी होती है।

जब ब्रह्मा जी श्रृष्टि की रचना कर रहे थे तब नारद जैसे कई लोगो की रचना कियें। सभी वैराग्य धारण कर लिए परिणाम स्वरूप श्रृष्टि का विकास नहीं हो रहा था तब ब्रह्म जी को चिंता सताने लगती है और मां आदि शक्ती को याद करने लगे। वहा पर मां आदि शक्ति आकर बताती है कि जब तक धरती पर पुरुष और स्त्री का की रचना एक साथ नहीं होगी तब तक श्रृष्टि का विकास संभव नहीं है। इस प्रकार मां आदि शक्ति की कृपा स्वरूप ब्रम्हा जी ने प्रजापति दक्ष एवं एक सुंदर स्त्री की रचना कर उनका विवाह संपन्न करवाते है जिससे इस धरती पर समस्त जीवों का निर्माण होता है।
सदगुरु जी बताते है कि जीवन में शादी माता-पिता के आदेश से ही होना चाहिए। शादियां हमेशा धर्म एवं मर्यादा के तहत होनी चाहिए क्योंकि जीवन मर्यादा में रहकर ही जीवन को सुखमय व्यतीत किया जा सकता है। हर निर्णय पति-पत्नी को मिलकर लेना चाहिए कभी भी अकेले निर्णय नहीं लेना चाहिए
ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

