अप्रतिम श्रध्दांजली : पुण्य श्लोका महारानी अहिल्याबाई होल्कर पर होगा विशेषांक का लोकार्पण
महाराष्ट्र के चांडी नामक छोटे से गांव में पाटिल परिवार में 31 मई 1725 ईस्वी में जन्मी ‘अहिल्याबाई होल्कर’ ने जीवन पर्यंत सदैव अपने राज्य और वहां के निवासियों के हित में ही कार्य किया, महारानी अहिल्याबाई ने न केवल अनेकों जनकल्याण के कार्य किया बल्कि तात्कालिक समाज में फैली रूढ़ियों को भी दूर करने में भागीरथी योगदान दिया.
महारानी अहिल्याबाई होल्कर का शासन एक न्यायप्रिय और जनकल्याणकारी शासन था,
महारानी अहिल्याबाई होल्कर के असाधारण गुणों को देखकर ब्रिटिश इतिहासकार जॉन कीथ उन्हें दार्शनिक रानी की उपाधि दी,
केवल अपने राज्य में ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण देश के मंदिरों की पूजन-व्यवस्था और उनके आर्थिक प्रबंधन पर भी उन्होंने विशेष ध्यान दिया।
बद्रीनाथ से रामेश्वरम तक और द्वारिका से लेकर पुरी तक आक्रमणकारियों द्वारा क्षतिग्रस्त मंदिरों का उन्होंने पुनर्निर्माण करवाया।
प्राचीन काल से चलती आई और आक्रमण काल में खंडित हुई तीर्थयात्राओं में उनके कार्यो से नवीन चेतना आयी। इन बृहद कार्यो के कारण उन्हे पुण्य श्लोका की उपाधि मिली।
ऐसी पुण्यश्लोका महारानी अहिल्यादेवी होल्कर की 300वीं जन्म जयंती पूरा देश मना रहा है।
अनेक सामाजिक संस्थाएं एवं महिला संगठन उनके जयंती वर्ष में उनके अलग-अलग गुणों को प्रकट करने वाले कार्यक्रम एवं गोष्ठियों का आयोजन कर रहे हैं।। अनेक सरकारें भी महारानी अहिल्याबाई के सुशासन, नगरीय विकास, रोजगारपरक उद्योग नीति जैसे विषयों पर संवाद आयोजित कर रही है। इसी क्रम में विश्व संवाद केंद्र, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित की जाने वाली साप्ताहिक पत्रिका ध्येय मार्ग का इस बार का विशेषांक रानी अहिल्याबाई होलकर जी को समर्पित है. जिसमे पूरे देश के विभिन्न लेखकों और साहित्यकारों के लेख संकलित किए गए।
विश्व संवाद केंद्र गोरखपुर द्वारा ध्येय मार्ग के 2024 के विशेषांक पुण्यश्लोका अहिल्या देवी होल्वार का लोकार्पण 07 अक्टूबर 2024 को सायं 05:45 बजे रामनप्रताल तारामंडल स्थित योगिराज बाबा गम्भीर नाथ प्रेक्षा गृह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाहक श्रीमान दत्तात्रेय होसबाले जी द्वारा किया जायेगा। उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पूनम टंडन जी करेंगी।
प्रोफेसर ईश्वर शरण विश्वकर्मा अध्यक्ष, विश्व संवाद केन्द्र,गोरखपुर
तथा
डॉ० उमेश कुमार सिह सचिव विश्व संवाद केन्द्र, गोरखपुर,
एवं सम्बन्धित संस्था के अन्य गणमान्य सदस्यों
के द्वारा इस संबंध में 5 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया,
जिसमें प्रोफेसर ईश्वर शरण विश्वकर्मा के द्वारा महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई

