“इमरजेंसी विभाग की तत्परता और विशेष उपचार पद्धति से चार दिन में मरीज हुई पूर्णतः स्वस्थ; “
गोरखपुर। AIIMS गोरखपुर की ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की टीम ने एक अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा आनुवांशिक बीमारी हेरिडिटरी एंजियोडेमा (Hereditary Angioedema) से ग्रसित 28 वर्षीय महिला की जान बचाकर चिकित्सकीय उत्कृष्टता का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया है।
मरीज अत्यधिक चेहरे की सूजन और सांस लेने में गंभीर तकलीफ के साथ इमरजेंसी विभाग में लाई गई थी। तत्काल जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि मरीज को आनुवांशिक एंजियोडेमा का तीव्र दौरा पड़ा है — एक ऐसी स्थिति जो जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है, खासकर तब जब समय रहते उचित उपचार न मिले।
गौरतलब है कि इस बीमारी से मरीज पहले भी परेशान रही है और इस बीमारी के चलते उन्होंने अपनी माता को भी खो दिया था, जिससे उनका मानसिक तनाव और बढ़ गया था। लेकिन AIIMS गोरखपुर की इमरजेंसी टीम ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना समय गंवाए तुरंत विशेष उपचार शुरू किया।
क्या होता है हेरिडिटरी एंजियोडेमा?
हेरिडिटरी एंजियोडेमा एक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी है, जो शरीर में C1 इनहिबिटर नामक प्रोटीन की कमी या दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण होती है। यह स्थिति जीन्स में परिवर्तन के चलते उत्पन्न होती है और अनुमानतः 50,000 में से केवल एक व्यक्ति इससे प्रभावित होता है।
क्यों खतरनाक है यह बीमारी:
इसमें श्वसन तंत्र (airway) में सूजन आ जाने के कारण मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है। समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा हो सकता है।
चेहरे, गले और शरीर के अन्य हिस्सों में असामान्य सूजन हो सकती है।
कभी-कभी पूरे शरीर में दाने भी हो सकते हैं, जो खुजली वाले या बिना खुजली के हो सकते हैं।
सामान्य एलर्जी या सूजन की दवाएं इसमें असर नहीं करतीं। इसके लिए विशेष प्रकार की दवाओं और खून के विशेष अवयवों से इलाज आवश्यक होता है।
उपचार की विशेषता:
AIIMS गोरखपुर की ट्रॉमा एवं इमरजेंसी टीम ने मरीज को 24 घंटे निगरानी में रखते हुए उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की। बीमारी की जटिलता को देखते हुए अन्य विभागों के विशेषज्ञों की भी सहायता ली गई। मरीज को चार दिनों तक गहन निगरानी और उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ कर घर भेज दिया गया।
संस्थान के *कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ विभा दत्ता* की सराहना:
AIIMS गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक ने इस दुर्लभ और जटिल बीमारी की समय रहते सफल पहचान और प्रभावी इलाज के लिए पूरी चिकित्सकीय टीम की सराहना की। उन्होंने टीम के समर्पण, क्लिनिकल कौशल और तालमेल की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि “इस प्रकार के दुर्लभ मामलों में त्वरित निर्णय और समन्वित प्रयास ही मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।”
उपचार टीम:
डॉ. सुहास – ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग
डॉ. सुनील गुप्ता – चर्म रोग विशेषज्ञ
डॉ. अखिलेश कुमार – रेजिडेंट डॉक्टर
डॉ. रजत – रेजिडेंट डॉक्टर
AIIMS गोरखपुर की यह उपलब्धि न केवल दुर्लभ रोगों की चिकित्सा में संस्थान की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि तत्परता, टीम वर्क और विशेषज्ञता के बल पर किसी भी जटिल परिस्थिति को सफलतापूर्वक संभाला जा सकता है।
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