सनातन परम्परा में सर्व हिन्दू समाज नीहित है,जिसमें सम्पूर्ण समाज को साथ में एकात्म भाव से लेकर चलता है। सनातन परंपराओं के उत्थान से ही भारत का उत्थान ,समाज का उत्थान होगा। भविष्य में सनातन परम्परा का नैतिक निर्वहन करना हम सभी का कर्तव्य है। इसी भावना से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रक्षाबंधन उत्सव मनाता है। संघ के छ: उत्सवों में से एक रक्षाबंधन उत्सव है। हमारा जन्म जिस सनातन परम्परा में हुआ है, वहाँ प्रत्येक दिन कोई न कोई उत्सव या पर्व मनाया जाता है। पूरा सावन ही उत्सव सा लगता है। बुन्देलखण्ड में पूरे सावन भर आल्हा-ऊदल का उत्सव मनाया जाता है, गीत गाए जाते हैं। “हर दिन पावन” की भावना से काशी में 365 दिन त्योहार मनाए जाते हैं। ये हमारे उत्सव-त्योहार नहीं हमारी परम्परा है। समाज-रचना को लम्बे समय तक चलाए जाते रहने के कारण हमारे पूर्वजों ने ऐसी रचना की। अभी आपने ‘नागपंचमी’ का त्योहार मनाया होगा जिसमें विषैले नाग को भी पूजा जाता है। हिन्दू धर्म कितना महान है! सम्पूर्ण उत्तर भारत में ‘दशहरा’ का पर्व उल्लासपूर्वक मनाया जाता है। उक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दक्षिण भाग द्वारा बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित रक्षाबंधन उत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने कही।


