विश्व बंधुत्व दिवस समारोह का आयोज
गणित एवं सांख्यिकी विभाग में हुआ विश्व बंधुत्व दिवस का आयोजन आज दिनांक 19 सितंबर को गणित एवं सांख्यिकी विभाग तथा विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के संयुक्त तत्वाधान में विश्व बंधुत्व दिवस का आयोजन किया गया। आयोजन की मुख्य अतिथि विवेकानंद केंद्र की प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख प्रोफेसर विनोद सोलंकी एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने की। कार्यक्रम का प्रारंभ में उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम संचालक प्रोफेसर सुधीर कुमार श्रीवास्तव नेबताया कि सितंबर 1893 में स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो में दिए गए वक्तव्यों पर आधारित एक पुस्तक जिसमें स्वामी जी के द्वारा धर्म संसद में दिए गए छह दिवसों के उद्बोधन का संग्रह था, “शिकागो व्याख्यान प्रतियोगिता” का आयोजन विवेकानंद केंद्र के सहयोग से किया गया था।प्रतियोगिता में गोरखपुर एवं कुशीनगर के 20 महाविद्यालयों, इंटर कॉलेज के 1007 विद्यार्थियों ने भाग लिया। गोरखपुर क्षेत्र के महाविद्यालयों के आई पी एम गीडा ,महात्मा गांधी पीजी कॉलेज, दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट अंक प्राप्त 56 विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि प्रोफेसर विनोद सोलंकी के द्वारा पुरस्कृत किया गया। प्रथम तीन स्थान प्राप्त छात्राओं ने स्वामी जी द्वारा शिकागो के विभिन्न दिवसों पर दिए गए वक्तव्यों को संक्षेप में प्रस्तुत किया।
धर्म संसद के प्रथम एवं पांचवें दिवस के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए एमएससी तृतीय सेमेस्टर की छात्रा विजयl पांडे ने बताया कि जब प्रथम दिवस पर स्वामी विवेकानंद ने अपने अभिवादन में अमेरिका के बहनों और भाइयों का संबोधन किया तो आट इंस्टीट्यूट आफ शिकागो में पूरे 2 मिनट तक तालियां बजती रही। उन्होंने कहा कि मैं दुनिया की सबसे पुरानी संत परंपरा और सभी धर्मो की जननी की तरफ से आप सभी को धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे विश्व के प्राचीनतम हिंदू धर्म के प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने का मौका दिया। स्वामी जी ने इस धर्म सभा की तुलना सम्राट अशोक की धर्म सभाओं तथा अकबर बादशाह के धर्म सम्मेलनों से करके परिषद की ऐतिहासिक महत्व को प्रकट किया। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं उसे धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया। सबसे महत्वपूर्ण नवम दिवस के भाषण के संबंध में बोलते हुए कुमारी ऐश्वर्या पाल ने बताया की इसमें स्वामी जी ने समाधि ,धर्म विज्ञान, हिंदू धर्म व विज्ञान के सामंजस्य ,मूर्ति पूजा, हिंदू धर्म की उदारता तथा सार्वभौमिक धर्म पर अपने विचार रखें। हिंदू धर्म तथा विज्ञान के सामंजस्य को स्पष्ट करते हुए स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि हिंदू धर्म के सिद्धांत जो इतने दिनों से हिंदू अपने अंतःकरण में धारण किए हुए हैं वही सिद्धांत आज बड़ी प्रबल भाषा में विज्ञान के अत्याधुनिक प्रयोगों द्वारा अधिक स्पष्ट रूप से सिद्ध करके दिखाया जा रहा है। नवम दिवस के वक्तव्य को आगे बढ़ते हुए कुमारी नीतिका मिश्रा ने बताया कि स्वामी जी ने हिंदू धर्म की शक्तियों को उजागर करते हुए कहा कि दुनिया में मात्र तीन धर्म ही पौराणिक काल से हमारे बीच में चले आ रहे हैं हिंदू पारसी एवं यह होती लेकिन यहूदी धर्म और पारसी धर्म होने अपने से उत्पन्न अन्य धर्म को अपने अंदर समाहित नहीं कर सका इसके कारण उन्हें मानने वालों की संख्या सीमित होती चली गई अपने हिंदू धर्म की कहानी बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत में भी एक के बाद एक न जाने कितने ही संप्रदायों का उदय हुआ और उन्होंने वैदिक धर्म को जड़ से हिला कर रख दिया परंतु अंत में हिंदू धर्म ने माता के समान सभी धर्म को अपने अंदर समाहित कर लिया हिंदू धर्म में तो वेदंतु मूर्ति पूजा पौराणिक ग उपनिषदों बौद्ध के अज्ञातवाद तथा जनों के निरिश्वाद का भी स्थान निश्चित है। उन्होंने बताया कि हिंदुओं ने अपना धर्म अपौरुषेय वेदों से प्राप्त किया वेदों का अर्थ है विभिन्न कालों में विभिन्न ऋषि मुनियों द्वारा खोजे गए आध्यात्मिक तत्वों का खजाना है स्वामी जी बताते हैं कि वेद अनाड़ी व अनंत है। अपने अपने उद्बोधन में उन्होंने आत्मा एवं पूर्व स्मरण के बारे में भी विस्तृत चर्चा की। दसवीं दिवस एवं अंतिम दिवस की चर्चा करते हुए एमएससी तृतीय सेमेस्टर की छात्रा सानिया जरताब ने बताया कि स्वामी जी ने कहां की हमारे हिंदू धर्म में एक अधिक न्याय पूर्ण समृद्ध और समावेशी दुनिया बनाने की क्षमता है उन्होंने छुआछूत और उपेक्षा का कड़ा विरोध किया उन्होंने जातिवाद की आलोचना करते हुए कहा कि धर्म जाति भेद नहीं है जाती तो एक सामाजिक बंधन मंत्र है स्वामी विवेकानंद जी के अनुसार धर्म मनुष्य को राष्ट्रीयता से बनता है अधिवेशन के अंतिम दिवस 27 सितंबर को अपने समापन भाषण में विवेकानंद जी ने फिर से सद्भाव और स्वीकृति पर जोड़ दिया वे केवल सार्वभौमिक सहनशीलता में विश्वास नहीं रखते थे बल्कि वे दुनिया के सभी धर्म को सत्य के रूप में स्वीकार करते थे उन्होंने धर्मांतरण का विरोध करते हुए कहा कि सभी लोगों को अपने-अपने धर्म का पालन करना चाहिए और अपने धर्म में बने रहते हुए दूसरे धर्म की अच्छाइयों को भी आत्मसात करना चाहिए उनका मानना था कि धार्मिक एकता किसी एक धर्म की विजय और बाकी धर्म के विनाश से सिद्ध नहीं होती यह व्यक्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए होती है उन्होंने अमेरिका के प्रति एक ऐसे कार्यक्रम की मेजबानी करने का आभार व्यक्त किया जिसने विभिन्न धर्मो के बीच की बाधा को तोड़ने का प्रयास किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए प्रोफेसर विनोद सोलंकी ने बालक नरेंद्र नाथ से विवेकानंद तक की यात्रा का पूर्ण विवरण छात्र-छात्राओं को बताया उन्होंने बताया की विवेकानंद इस शताब्दी के प्रारंभ से ही हमारे युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहे और उनके विचारों और अभिव्यक्तियों पर चलकर हम अपने राष्ट्र को उच्च स्तर पर पहुंचा सकते हैं। अपने अपने अध्यक्ष की उद्बोधन में माननीय कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने बताया की विश्व बंधुत्व की परिकल्पना हमारे भारतवर्ष की प्राचीन परंपरा है। महोपनिषद के के चौथे अध्याय के 77वे श्लोक को उदृत करते हुए उन्होंने बताया की वसुधैव कुटुंबकम की परिकल्पना हमें वहां से ही प्राप्त हुई। एमएससी तृतीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं द्वारा अपने आने वाले अनुजों के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा मे गणित विषय से संबंधित 37000 मूल्य की पुस्तक विभागीय लाइब्रेरी को समर्पित की गई । जिसकी प्रशंसा करते हुए माननीय कुलपति ने कहा कि यह हमारे छात्रों के बीच एक उच्च परंपरा को स्थापित करेगी कि वह अपने आने वाले छात्राओं को उच्च भारती परंपरा की ओर ले जाने के लिए अपना सहयोग किस प्रकार करें। विवेकानंद केंद्र के नगर संचालक श्री अवधेश कुमार सिंह ने आभार प्रकट किया एवं श्री पवित्र नारायण शुक्ला ने शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर हिमांशु पांडे ए प्रोफेसर रजनीकांत पांडे विवाह का अध्यक्ष गणित प्रोफेसर विजय कुमार एवं गणित एवं सांख्यिकी विभाग के समस्त शिक्षकों ने प्रतिभा किया।
विवेकानंद रॉक मेमोरियल एवं विवेकानंद केंद्र तथा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के बीच हुआ MOU
इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय के बीच एक एमओयू हुआ जिसमें विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व विकास एवं आध्यात्मिक विकास के लिए केंद्र द्वारा सहयोग करने तथा मूल्य आधारित पाठ्यक्रमों को चलाने के लिए प्रशिक्षित अधिकारियों से सहयोग का प्रावधान रखा गया। एम ओ यू में योग से संबंधित कार्यशालाओं आयोजन, योग से संबंधित सर्टिफिकेट कोर्सेज एवं योगा टीचर्स को प्रशिक्षित करने का प्रावधान है। परिसर में स्थित विवेकानंद वाटिका को संरक्षित एवं सौन्दर्यवर्धक करने का संकल्प MOU में है। विश्वविद्यालय की ओर से कुल सचिव प्रोफेसर शांतनु रस्तोगी एवं डॉक्टर कुशलनाथ मिश्रा निदेशक, महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ शोधपीठ ने तथा विवेकानंद केंद्र की ओर से महासचिव श्री भानु दास एवं प्रांत संगठन उत्तर प्रदेश श्री अतुल गाभने हस्ताक्षर किए।
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