“आज सन्ध्या उपरान्त, आरती आरम्भ होने से ठीक पूर्व बालाजी मन्दिर में एक अद्भुत और अलौकिक घटना घटी। उस समय सम्पूर्ण मन्दिर नितान्त शांत और बिल्कुल खाली था। दीपों की मृदु लौ और धूप की सुगन्ध मात्र वातावरण में व्याप्त थी।
इसी पवित्र नीरवता के बीच अचानक शिवलिंग के समीप एक श्वेत कपोत आकर सहज ही ठहर गया। उसने मानो शिवलिंग के पास कोमल दस्तक दी और फिर स्थिर होकर एकटक शिवलिंग को निहारने लगा, जैसे किसी दिव्य शक्ति से उसका मौन संवाद चल रहा हो।
कुछ क्षणों तक वह कपोत उसी स्थान पर शांत बैठा रहा। उसकी उपस्थिति से मन्दिर का वातावरण और अधिक पवित्र, आध्यात्मिक और चमत्कारी प्रतीत होने लगा। कुछ देर पश्चात वह धीरे-धीरे उड़कर चला गया, परन्तु उस क्षण की दिव्यता मन में गहराई तक बस गयी।
बालाजी मन्दिर में आरती से पूर्व घटी यह अलौकिक अनुभूति आज भी हृदय में श्रद्धा और विस्मय की तरंगें उत्पन्न कर रही है।”