भारत, चीन और रूस के साथ C-5 ग्रुप बनाना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका का चौंकाने वाला प्रस्ताव, G7 का अस्तित्व होगा खत्म?।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब एक नए वैश्विक गठबंधन की बात कर रहे हैं.।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप G-8 से रूस को हटाने का विरोध कर चुके हैं।
G-8 से 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया पर हमले के बाद रूस को बाहर कर दिया गया था।
ट्रंप प्रशासन C5 नाम से एक समूह बनाने पर विचार कर रहा है, जिसमें अमेरिका, चीन, रूस, भारत और जापान शामिल होंगे.।
इस नए समूह का मकसद G7 जैसे पुराने गठबंधनों का विकल्प तैयार करना बताया जा रहा है.।
यह विचार अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS) के एक लंबे अप्रकाशित संस्करण में सामने आया था।
अमेरिका की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी (NSS) के सार्वजनिक होने के बाद पूरी दुनिया में हलचल मच गई। जिसमें चीन का मुकाबला करने की नीति, यूरोप की रक्षा से अमेरिका का हटना जैसी बातें शामिल थीं।।
■ ट्रंप प्रशासन की तरफ से किए जाने वाले बहुत बड़े बदलाव शामिल हैं। इसमें C-5 का जिक्र किया गया है, जिसने दुनिया भर के डिफेंस एक्सपर्ट्स का ध्यान खींचा है।
■ NSS के लीक ड्राफ्ट में वैश्विक शक्तियों के बीच शक्ति संतुलन करने का दिलचस्प प्रस्ताव शामिल किया गया है। इसमें एक नया संगठन C-5 के गठन की बात कही गई है, जो G7 या G20 की तरह आर्थिक या लोकतांत्रिक मानदंडों पर आधारित नहीं होगा, बल्कि दुनिया की पांच बड़ी जनसंख्या वाले शक्तिशाली देशों, अमेरिका, चीन, रूस, भारत और जापान का मंच होगा।
■ ट्रंप प्रशासन के इस प्लान के मुताबिक C5 भी नियमित शिखर सम्मेलन करेगा और प्रमुख जियो-पॉलिटिकल मुद्दों का समाधान खोजने की कोशिश करेगा। इसकी पहली बैठक का प्रस्तावित एजेंडा भी दस्तावेज में दर्ज किया गया है, जिसमें इजरायल और सऊदी अरब के बीच संबंधों को सामान्य करने की बात कही गई है।
■ इसके अलावा, इसमें एक और चीज जो बेहद दिलचस्प है, वो ये कि ट्रंप प्रशासन मानता है कि अमेरिकी दबदबा बनाए रखना संभव नहीं है। इस दस्तावेज में साफ साफ कहा गया है कि ‘अमेरिकी वर्चस्व बनाए रखना ना तो संभव है और ना ही ऐसा करना समझदारी है।’
■ इस दस्तावेज में कहा गया है कि “शीत युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका के नीति निर्माताओं ने मान लिया था कि दुनिया पर अमेरिका का स्थायी दबदबा राष्ट्रीय हित के लिए जरूरी है” लेकिन इस दस्तावेज में कहा गया है कि अमेरिका को किसी दूसरे देश के अंदरूनी मामलों में तभी हस्तक्षेप करना चाहिए, जब उस देश से अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी को डायरेक्ट खतरा हो।
■ रूस के हटने के बाद अमेरिका के नेतृत्व में G-7 काम कर रहा है, जो एक शक्तिशाली समूह है। G-7 एक लोकतांत्रिक देशों का समूह है, जो अपने हिसाब से वैश्विक अर्थव्यवस्था की नीति बनाता है और दूसरे जियो-पॉलिटिकल मुद्दों को सुलझाने का दावा करता है।
“हालांकि G-20 और ब्रिक्स जैसे समूह के प्रभावशाली होने की स्थिति में अब G-7 के प्रभाव पर गंभीर सवाल उठे हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर C-5 बनता है, तो G-7 का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। जी-7 समूह में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम हैं।”
“PM मोदी ने ट्रम्प से फोन पर बात की: दोनों देशों के संबंध बेहतर करने पर चर्चा”
प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से फोन पर बातचीत की है।
* मोदी ने कहा कि उनकी बातचीत गर्मजोशी भरी और सकारात्मक रही।
* मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।
* बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।* साथ ही अहम तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
* भारत ने अमेरिका को पानी पिला दिया है।
* ट्रेड डील के लिए जारी बातचीत में वह अमेरिका को कोई अनुचित छूट देने को जरा भी तैयार नहीं है।
* अमेरिकी प्रतिनिधियों ने स्वीकार कर लिया है कि भारत को मोलतोल में तोड़ पाना आसान नहीं है।
*अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ने भारत को ‘अ टफ नट टू क्रैक’ बताया है। यह मुहावरा किसी व्यक्ति, समस्या, या स्थिति के बारे में बताता है जिसे समझना, हल करना या संभालना बहुत कठिन या मुश्किल हो।**टेक वर्ल्ड की 3 दिग्गज कंपनियां भारत में करेंगी 67.5 अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट, खुलेंगे लाखों जॉब्स के नए दरवाजे*
*टेक कंपनियों का गढ़ बना भारत, छह लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश की योजना; आउटसोर्सिंग से बढ़ा आगे*
भारत दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को लालायित कर रहा है।
* गूगल ने पहले 15 अरब डॉलर की घोषणा की थी
* माइक्रोसॉफ्ट ने 17.5 अरब डॉलर
* अमेजन ने सबसे अधिक 35 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर इस खेल को और आकर्षक बना दिया हैतीन प्रमुख टेक कंपनियों ने कुछ वर्षों में भारत में छह लाख करोड़ रुपये (67 अरब डॉलर) के निवेश की योजना बनाई हैं।
दिग्गज टेक कंपनियों का भारत में अचानक निवेश कोई जल्दबाजी का मामला नहीं है। यह भारत में बढ़ रही टेक्नोलॉजी की मांग को लेकर अगले कुछ दशकों तक की एक लंबी योजना है। कुछ समय पहले तक भारत मुख्य रूप से आउटसोर्सिंग व उपभोक्ता अधिग्रहण का बाजार था। लेकिन हाल में बड़े निवेश से यह क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) डाटा सिस्टम और गहन तकनीकी नवाचार के केंद्र के रूप में उभर रहा है।
अमेजन- अब तक 75 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा, 38 लाख को मिलेगा*
रोजगार।अमेजन डॉट कॉम इंक ने पांच वर्षों में 35 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है (यह पहले के 40 अरब डॉलर के अतिरिक्त है)। वह क्विक कॉमर्स से लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग तक के क्षेत्रों में विस्तार करेगी। ई-कॉमर्स दिग्गज ने कहा, वह एआई और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में निवेश करेगी। 2030 तक किया जाने वाला निवेश भारत में 38 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित करेगा। यह निवेश भारत की प्राथमिकताओं के अनुरूप है। इसका उद्देश्य एआई क्षमताओं का विस्तार, लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को मजबूत करना व छोटे व्यवसायों के विकास में सहयोग देना और रोजगार सृजित करना है। 2024 में विभिन्न उद्योगों में 28 लाख प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष व मौसमी नौकरियां उत्पन्न की। 1.2 करोड़ से अधिक छोटे व्यवसायों का डिजिटलीकरण किया है।
एक दिन पहले माइक्रोसॉफ्ट ने किया 1.58 लाख करोड़ के निवेश का एलान
सॉफ्टवेयर क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एक दिन पहले ही 2030 तक भारत में डाटा सेंटर, एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब 1.58 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। गूगल भी एआई डाटा सेंटर के लिए करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जता चुकी है।
गूगल- एआई हब स्थापित करने पर जोर*
अक्तूबर में गूगल ने घोषणा की कि पांच वर्षों में भारत में पहला एआई हब स्थापित करने के लिए 15 अरब डॉलर का निवेश करेगी। यह हब वैश्विक स्तर पर गूगल के सबसे बड़े हबों में से एक होगा। कुछ ही महीनों में घोषित तीनों कंपनियों की 67 अरब डॉलर से अधिक की यह प्रतिबद्धताएं भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्र बनने की संभावनाओं में विश्वास को बता रही हैं।इसलिए भारत निवेश के लिए आकर्षण का केंद्र*
दो दशकों तक चीन वैश्विक डिजिटल विस्तार का केंद्र रहा। देशों के बीच बढ़ते तनाव व राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने अमेरिकी कंपनियों को एआई के दीर्घकालिक विकास के लिए अन्य विशाल और स्थिर बाजारों की तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया। भारत पर ध्यान केंद्रित करके, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन व गूगल जैसी कंपनियां वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं व क्लाउड नेटवर्क को ऐसे विश्व के लिए पुनर्गठित कर रही हैं, जिसमें चीन अब संवेदनशील या अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य नहीं कर सकता।140 करोड़ की आबादी में सफलता की गारंटी*
140 करोड़ से अधिक आबादी, सैकड़ों भाषाओं व डिजिटल भुगतान व ई-कॉमर्स की ओर बढ़ते यूजर्स के साथ भारत एआई मॉडलों के लिए चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण मैदान प्रदान करता है। यदि कोई एआई मॉडल भारतीय समाज की जटिलता के भीतर सहजता से कार्य करता है, तो उसके किसी भी अन्य वैश्विक बाजार में सफल होने की अधिक संभावना है।डाटा को देश में ही स्टोर करने की योजना*
सरकारी और निजी क्लाउड लॉन्च करने का माइक्रोसॉफ्ट का निर्णय घरेलू स्तर पर संभालने में सक्षम होगा। अमेजन का लॉजिस्टिक्स व एडब्ल्यूएस डाटा केंद्रों में विस्तार व गूगल की एआई कंप्यूटिंग क्षेत्र बनाने की प्रतिबद्धता भी भारत के इस प्रयास के तहत है कि संवेदनशील डाटा कभी भी देश से बाहर न जाए।वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत में अमेजन खासकर क्विक कॉमर्स में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने पर जोर दे रही है। अमेजन, वॉलमार्ट समर्थित फ्लिपकार्ट के साथ ब्लिंकइट, स्विगी लि. की इंस्टामार्ट व जेप्टो जैसी त्वरित डिलीवरी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए निवेश बढ़ा रही है।

