गंगा जैव विविधता एवं आद्रभूमि संरक्षण पर कार्यशाला का दी द उ के कृषि संस्थान मे हुआ शुभारंभ
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून, और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों के संरक्षण पर हितधारकों की दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ 18 अगस्त को संवाद भवन में हुआ। कार्यशाला का शुभारम्भ कुलपति द्वारा दीप प्रज्वलन करके किया गया।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन उपस्थित रही। कुलपति प्रो. टण्डन ने गंगा नदी तथा आद्र भूमि संरक्षण के महत्व को प्रमुखता देते हुए कार्यशाला की सराहना की और इस कार्यशाला का उद्देश्य गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों जैसे राप्ती और रोहिणी के संरक्षण के लिए विभिन्न हितधारकों की राय और आकांक्षाओं का निर्माण करना बताया I कुलपति ने कृषि संकाय के इस नई पहल की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि प्रतिभागी गण इस कार्यशाला के माध्यम से ना सिर्फ स्वयं जागरूक होंगे बल्कि अन्य लोगों को भी जागरूक करेंगे। कुलपति ने कृषि संस्थान मे पुरातन छात्र संगठन बनाने पर जोर दिया। कृषि संस्थान से पिछले दो वर्षों ( 2023 व 2024) के स्नातकोत्तर उत्तीर्ण छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की। कृषि संस्थान के निदेशक ने सभी आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय संस्कृति में गंगा के महत्व पर प्रकाश डाला। निदेशक प्रो मिश्र ने गंगा को भारत की प्राण रेखा कहते हुए इसकी पवित्रता को बचाए रखकर प्रदूषण मुक्त करने का आह्वान किया। उन्होनें कृषि संस्थान के छात्रों की उपलब्धियों की विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम मे विशिष्ट अतिथि के रूप मे विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो शान्तनु रस्तोगी ने गंगा के इकोसिस्टम को संरक्षित करने की भारतीय वन्यजीव संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए गंगा की सहायक नदियों के संरक्षण पर जोर दिया। विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो अनुभूति दूबे ने गंगा को जीवनदायिनी बताते हुए गंगा के किनारे के तटीय मैदान की उर्वरता पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र मे मुख्य रूप से अधिष्ठाता कला संकाय प्रो राजवन्त राव, अधिष्ठाता लाॅ संकाय प्रो अहमद नसीम, उच्च शिक्षाधिकारी प्रो अश्विनी मिश्र , प्रो विमलेश मिश्र, प्रो उमेश नाथ त्रिपाठी, प्रो जितेंद्र मिश्र, प्रो दिनेश यादव, प्रो राजर्षि कुमार गौर, प्रो वी एन पाण्डेय, प्रो केशव सिंह, डा रामवन्त गुप्त, डा मनीष पाण्डेय, डा आशीष शुक्ल, डा स्मृति मल्ल, डा दीपा श्रीवास्तव, डा सत्य नारायण, डा अखिल मिश्र, कृषि संस्थान के सभी शिक्षक तथा बङी संख्या मे कृषि संस्थान के छात्र उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र का संचालन डा सरोज चौहान ने किया तथा धन्यवाद प्रस्ताव भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के डा सौफिल मलिक ने दिया। कार्यशाला के प्रथम सत्र का संचालन डा नुपुर सिंह और डा तल्हा अंसारी द्वारा किया गया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में डा दानिश कलीम, डा सौफिल मलिक तथा वन्यजीव संस्थान के अन्य विशेषज्ञों द्वारा जलीय प्रजातियां जैसे गंगा डॉल्फिन, कछुआ, ऊदबिलाव, घड़ियाल, मगरमच्छ तथा आद्र भूमि जैव विविधता जैसे जल पक्षी के बारे में जागरूकता फैलाने पर मुख्य ध्यान देते हुए प्रतिभागियों को जागरूक किया। कार्यशाला की रूपरेखा भारतीय वन्यजीव संस्थान के मोहम्मद दमास कलीम, प्रोजेक्ट एसोसिएट द्वारा दी गई।डॉ सैफिल मलिक, प्रोजेक्ट वैज्ञानिक ने जैव विविधता तथा एग्रोफोरेस्ट्री विषय पर प्रतिभागियों को विशेष जानकारी दी।संरक्षण कार्य में टीम निर्माण अभ्यास के बारे में जानकारी श्री अंशुल कुमार भावसार प्रोजेक्ट एसोसिएट तथा श्री राहुल गुप्ता सीनियर प्रोजेक्ट एसोसिएट द्वारा दी गई।कार्यशाला में 100 से ज्यादा प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों मे गंगा मे प्लास्टिक प्रदूषण तथा गंगा के किनारे रहने वाले मछुआरों पर प्रकाश डाला जाएगा। वन्यजीव संस्थान के राहुल गुप्त द्वारा हैंड्स आन टेनिंग भी दी जाएगी। वन्यजीव संस्थान से आए डा अंशुल भवसार गंगा के किनारे रहने वाले लोगों के सोशियो इकोलाजिकल रीसिलिएन्स पर प्रकाश डालेंगे। कार्यशाला के समापन समारोह के मुख्य अतिथि पद्म श्री रामचेत चौधरी होंगे। समापन समारोह के पूर्व कृषि संस्थान के छात्र द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी डा नुपुर सिंह और डा निखिल रघुवंशी के निर्देशन मे किया जाएगा।

