“स्थानीय लोगों में भी हैं खजनी की उपेक्षा का दर्द”
ब्यूरो प्रभारी: संतोष कुमार त्रिपाठी खजनी, गोरखपुर।
उनवल/खजनी। देश और प्रदेश में चारों तरफ विकास की लहर चल रही है, लेकिन जिले की खजनी तहसील का खजनी खूटभार कस्बा विकास की इन उजली किरणों से महरूम है।
यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र के निवासी रहें पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के असामायिक निधन के बाद यहां की सभी विकास योजनाऐं ठप पड गई। सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र होने के कारण यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की स्थिति यह है कि गोरखपुर जिले की सीमा से महज 12 किमी दूर स्थित खजनी कस्बा आज तक विकास कार्यों में अपेक्षाकृत काफी पीछे है।
इस क्षेत्र के कुछ स्थानीय लोगों ने यहां की जन समस्याओं को पत्रकारों साथ साझा करते हुए बताया है कि ;
समाजसेवी विमलेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब सांसद थे तब उस समय खुटभार – खजनी को गोद लिया था, जिसका अब तक अपेक्षित विकास नहीं हुआ। वर्षों पहले खजनी कस्बे और तहसील से रेलवे स्टेशन तक सस्ते किराए वाली सिटी बसें चलती थीं, आज प्राइवेट डग्गामार सवारी वाहनों, आटो और जीप के अलावा कोई नियमित सरकारी सार्वजनिक सेवा का वाहन यहां से जिले तक जाने के लिए नहीं मिलता है। बड़ी मुश्किल से इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू हुई, लेकिन वह भी नियमित नहीं है। 90 फीसदी लोग निजी या प्राइवेट वाहनों से धक्के खाते हुए जिले तक की यात्रा करते हैं, जिनमें विद्यार्थी, व्यापारी, शिक्षक तथा अन्य सरकारी तथा गैर सरकारी कर्मचारी प्रमुख हैं, जबकि पहले यहां पर रोडवेज का बस स्टैंड और टिकट घर भी था परन्तु वर्तमान में ऐसी कोई सुविधा यहां पर नहीं है।
रुद्रपुर खजनी के युवा व्यवसायी मंगलम भरतीया ने बताया कि कस्बे की सड़क ऊंची हो गई है और जल निकासी के लिए सड़क के किनारे बनी नालीयां पट चुकी है। घरों से निकलने वाले गंदे पानी के निस्तारण के लिए लोग वर्षों से नरकीय स्थिति में रह रहे हैं। बरसात में तो यह स्थिति और भी बुरी हो जाती है। जन प्रतिनिधि स्थानीय लोगों की समस्याओं को नहीं सुनते हैं।
प्रिन्स शुक्ला ने बताया कि तहसील क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे विषयों के अध्ययन के लिए क्षेत्र में कोई शिक्षण संस्थान नहीं हैं। इन विषयों की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों और अभिभावकों को मजबूर होकर परिवार के साथ किराए पर कमरा लेकर शहर में निवास करना पड़ता हैं।
समाजसेवी अमित सिंह मंझरिया ने बताया कि जिले में सिर्फ खजनी तहसील और कस्बा ही है जो कि नगर पंचायत नहीं है, जबकि अन्य सभी तहसीलें नगर पंचायत क्षेत्र हो चुकी हैं। खजनी की उपेक्षा की इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी?
शशिशेखर सिंह एडवोकेट ने बताया कि खजनी तहसील में दीवानी न्यायालय की मांग वर्षों पुरानी है। पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह की योजना भी थी और वें खजनी में दीवानी न्यायालय की स्थापना चाहते थे, परन्तु उनके जाने के बाद यह मामला ठंडा पड़ गया और आज तक खजनी में दीवानी न्यायालय तथा ग्राम न्यायालय की स्थापना नहीं हो पाई है। वादकारियों को बांसगांव और गोरखपुर जाना पड़ता है, जिसमें अतिरिक्त समय और धन खर्च होता है। उन्होंने बताया कि खजनी तहसील क्षेत्र में सबसे अधिक 739 राजस्व गांव हैं तथा यह 5.5 लाख से अधिक आबादी वाली जिले की सबसे बड़ी तहसील है। यहां पर दीवानी न्यायालय की स्थापना की मांग भी बहुत पुरानी है।
रुद्रप्रताप सिंह, प्रधान संघ जिला अध्यक्ष, ने बताया कि खजनी का एकमात्र उद्योग कंबल का कारखाना पूरी तरह से बंद हो गया है। पूर्व केंद्रीय लघु एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्री महावीर प्रसाद ने उसे रायबरेली में स्थापित करा दिया था। साथ ही वीर बहादुर सिंह के द्वारा हरिहरपुर में प्रस्तावित जैव अनुसंधान केंद्र और फर्टर्लिटी सेंटर का निर्माण भी आज तक नहीं हुआ। खजनी क्षेत्र के सांसदों और विधायकों ने भी यहां के लिए कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं किया है। गोरखपुर शहर का विकास मेडिकल काॅलेज रोड, सोनौली रोड,पिपराइच रोड, तारामंडल, सिक्टौर रोड, सहजनवां, गीडा, डोमिनगढ और नौसढ़ हर दिशा में हुआ, मगर खजनी कस्बा शहर के करीब हो कर भी आजतक उपेक्षा का शिकार है।
संगम उर्फ राहुल त्रिपाठी, ग्राम प्रधान रुद्रपुर, ने कहा कि किसी की भी निगाह नहीं गई खजनी की बदहाली की ओर,
नहीं तो खजनी कस्बा भी गोरखपुर महानगर क्षेत्र का हिस्सा होता।
आपको बता दें कि खजनी को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने के लिए 3 वर्ष पहले अधिसूचना जारी हुई थी। तत्कालीन एसडीएम के द्वारा भी 3 बार सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजा जा चुका है। किंतु अभी तक खजनी को नगर पंचायत क्षेत्र या टाउन एरिया का दर्जा नहीं मिला है।