“इलाज में लापरवाही का आरोप, परिजनों ने न्याय और कार्रवाई की उठाई मांग”
बांसगांव, गोरखपुर। गोरखपुर जनपद के बांसगांव क्षेत्र के माल्हनपार में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला पंचायत कर्मचारी की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने माल्हनपार चौराहे पर शव रखकर जाम लगा दिया। मृतका की पहचान राउतपार निवासी गीता देवी (40) पत्नी संजय प्रसाद के रूप में हुई है, जो स्थानीय पंचायत में सफाई कर्मचारी थीं और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मुखलाल प्रसाद की पतोहु बताई जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, गीता देवी को 23 अक्टूबर 2025 को माल्हनपार स्थित चंद हॉस्पिटल में ट्यूमर ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया था। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से उनकी नस कट गई, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। स्थिति बिगड़ने पर परिजनों को तत्काल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाद में उन्हें पहले गोरखपुर और फिर लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में रेफर किया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चलने के बाद रविवार की देर रात उनकी मौत हो गई।
सोमवार सुबह शव घर पहुंचते ही परिवार और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में लोग माल्हनपार चौराहे पर जुट गए और शव रखकर चक्का जाम कर दिया। मौके पर महिलाओं और युवाओं की भी बड़ी भीड़ रही। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टर पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने और न्याय दिलाने की मांग की।
हंगामे के दौरान भीड़ ने अस्पताल के डॉक्टर से धक्का-मुक्की भी की, जिसे मौके पर मौजूद पुलिस ने किसी तरह सुरक्षित अपने घेरे में लेकर बाहर निकाला। तनाव को देखते हुए बांसगांव, गगहा, बड़हलगंज और खजनी थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई।
एसडीएम बांसगांव, सीओ खजनी और थानाध्यक्ष बांसगांव के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन लगातार लोगों को समझाने का प्रयास करता रहा, मगर देर शाम तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। आक्रोशित भीड़ जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ी रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की चिकित्सा सुरक्षा से जुड़ा है। अगर अस्पताल प्रशासन की गलती साबित होती है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की जवाबदेही और चिकित्सकीय लापरवाही के मुद्दे को सामने ला दिया है। ग्रामीणों और परिजनों की एक ही मांग है, “गीता देवी को न्याय मिले और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।”

