मुख्यमंत्री डैशबोर्ड अनुश्रवण समिति की बैठक में डीएम दीपक मीणा सख्तl
लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्यवाही, कहा — अच्छा कार्य करने वालों को मिले प्रोत्साहन
गोरखपुर। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड अनुश्रवण समिति की समीक्षा बैठक मंगलवार को विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी दीपक मीणा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की प्रगति, डैशबोर्ड पर डाटा फीडिंग और विकास कार्यों की समीक्षा की गई। डीएम ने कहा कि शासन की प्राथमिकता वाले कार्यों में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम दीपक मीणा ने मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर अक्टूबर माह में गोरखपुर की 75वीं रैंकिंग को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह स्थिति जनपद की छवि के अनुरूप नहीं है और कुछ विभागों की लापरवाही से ऐसा परिणाम सामने आया है। डीएम ने कहा कि “गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण जिले का इस स्थान पर रहना चिंताजनक है। अब प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी तय करे और सुधार के लिए तुरंत कदम उठाए।”
डीएम ने डीएसटीओ (जिला सांख्यिकी अधिकारी) अनिल कुमार को निर्देश दिया कि जिन विभागों में कमी है, उन्हें उसी अनुपात में आवश्यक निर्देश दिए जाएं। उन्होंने कहा — “जो विभाग अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें अनावश्यक निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल आगे की कार्ययोजना बताई जाए, लेकिन जो विभाग कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं, उनके लिए सख्त सुधारात्मक निर्देश जारी किए जाएं।”
डीएम ने स्पष्ट किया कि “ई-ऑफिस पर फाइल भेज देने के बाद आपका काम खत्म नहीं होता। फाइल भेजने के बाद भी उसकी मॉनिटरिंग और फॉलोअप करना उतना ही जरूरी है।” उन्होंने कहा कि हर अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि शासन स्तर पर भेजे गए डाटा की सत्यता बनी रहे।
डीएम दीपक मीणा ने कहा कि जिन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, उन्होंने अब तक जवाब नहीं दिया है, तो उनके खिलाफ आगे की कार्यवाही पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा — “क्या नोटिस का जवाब तब आएगा जब कार्रवाई शुरू होगी?” यह कहते हुए डीएम ने चेतावनी दी कि अब जवाबदेही तय की जाएगी और जो अधिकारी अपने दायित्वों से विमुख हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी।
बैठक के दौरान डीएम ने मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, कृषि, पोषण, रोजगार, स्वच्छता, पेयजल और आधारभूत संरचना सहित सभी योजनाओं की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने विभागवार रिपोर्ट लेकर प्रदर्शन की तुलना की और निर्देश दिया कि आगामी समीक्षा बैठक तक सभी विभाग अपने लक्ष्यों को पूरा करें।
इस दौरान डीएम ने समाज कल्याण अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, डीपीआरओ, तथा नोडल पीडब्ल्यूडी अधिकारी डी. ए. सिंह से भी योजनाओं की प्रगति और कमियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सभी से कहा कि अपने-अपने विभागों की अद्यतन जानकारी समय पर पोर्टल पर अपलोड करें और सुधारात्मक कदम तुरंत उठाएं।
डीएम ने विकास भवन में स्वच्छता व्यवस्था के लिए कहा कि बाथरूम में सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जिस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए डीपीआरओ को निर्देश दिया कि सफाई व्यवस्था को तत्काल बेहतर किया जाए, ताकि दुर्गंध न फैले और आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि विकास भवन में आने वाले नागरिकों को स्वच्छ और सुव्यवस्थित वातावरण मिले। यह भवन जिले की प्रशासनिक पहचान है, इसलिए प्रत्येक विभाग अपने कार्यालय क्षेत्र में साफ-सफाई और अनुशासन बनाए रखे।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) शाश्वत त्रिपुरारी, जिला विकास अधिकारी राजमणि वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजेश झा, परियोजना निदेशक दीपक सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) रामेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अमरकांत सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) रमेंद्र सिंह, समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी श्रद्धा मिश्रा, एडीपीआरओ आशुतोष सिंह, नोडल पीडब्ल्यूडी डी. ए. सिंह सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि आगामी माह की रिपोर्ट में गोरखपुर की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा — “मुख्यमंत्री डैशबोर्ड केवल आंकड़ों की रिपोर्ट नहीं है, यह जनता के विश्वास और सरकारी कार्यों की पारदर्शिता का प्रतिबिंब है। इसलिए सभी अधिकारी मिशन मोड में कार्य करें, ताकि गोरखपुर का नाम राज्य के शीर्ष जिलों में शामिल हो सके।

