ब्रजेन्द्र कुमार सिंह
लखनऊ :उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है। भले ही विधानसभा चुनाव 2027 में हों, लेकिन सत्ता और विपक्ष—दोनों खेमों में राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज़ हो चुकी हैं।
योगी आदित्यनाथ सरकार जहां कानून-व्यवस्था, निवेश और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है, वहीं विपक्ष सरकार को महंगाई, बेरोज़गारी और सामाजिक मुद्दों पर घेरने की रणनीति में जुट गया है।
भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती पर खास ज़ोर दिया है। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, जनकल्याणकारी योजनाओं के ज़मीनी क्रियान्वयन और ‘डबल इंजन सरकार’ के फायदों को जनता तक पहुंचाने का अभियान तेज़ किया गया है। हाल के महीनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे, निवेश परियोजनाओं के शिलान्यास और अपराध पर सख्ती को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार के खिलाफ संयुक्त स्वर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार सरकार पर हमला बोलते हुए किसानों, युवाओं और पिछड़े वर्गों के मुद्दे उठा रहे हैं। कांग्रेस भी प्रदेश में अपनी खोई सियासी जमीन वापस पाने के लिए संगठन विस्तार और आक्रामक राजनीति की ओर बढ़ रही है।


