आज की बड़ी खबर सुप्रीम कोर्ट से सामने आई है, जहाँ कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए गाजियाबाद के हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि
13 साल से अचेत अवस्था में पड़े हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया दी जा सकती है।
बताया जा रहा है कि हरीश राणा पिछले कई वर्षों से कोमा में हैं और उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
यह मामला इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि
2018 के “कॉमन कॉज” फैसले को कानूनी रूप से लागू करते हुए यह देश का पहला मामला है, जिसमें अदालत ने पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी है।
जानकारी के मुताबिक,
हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल हो गए थे और तब से ही वे कोमा में चले गए।लंबे समय तक इलाज कराने के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ भी काफी बढ़ गया था।इसी के बाद परिवार ने अदालत में याचिका दायर कर इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की थी।
🎬 कोर्ट का फैसला (Court Decision)
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 2018 के कॉमन कॉज फैसले के आधार पर पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी।यह फैसला देश में इच्छामृत्यु से जुड़े कानून और मानवीय पहलुओं को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
फिलहाल इस फैसले को लेकर पूरे देश में चर्चा हो रही है और इसे कानून और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाने वाला फैसला बताया जा रहा है।
ऐसी ही बड़ी और सच्ची खबरों के लिए जुड़े रहिए
NT निष्पक्ष टुडे के साथ।