ज्योतिष डेस्क निष्पक्ष टुडे :-
दोपहर 1:54 बजे घटित होगी ग्रीष्म संक्रांति, 14 घंटे तक रहेगा दिन
गोरखपुर। 21 जून 2026 को भारत सहित पूरे उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात दर्ज की जाएगी। खगोलविद एवं एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर अमर पाल सिंह के अनुसार भारतीय समयानुसार दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) का सटीक खगोलीय क्षण घटित होगा। यह वह समय होता है जब सूर्य आकाश में अपनी सबसे उत्तरी स्थिति पर पहुंचता है और उसकी सीधी किरणें कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर पड़ती हैं।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ?
21 जून को होगा वर्ष का सबसे लंबा दिन
दोपहर 1:54 बजे घटित होगी ग्रीष्म संक्रांति
पृथ्वी की 23.5 डिग्री झुकी धुरी है मुख्य कारण उत्तर भारत में दिन लगभग 14 घंटे तक रहेगा। 21 जून के बाद धीरे-धीरे छोटे होने लगेंगे दिन।इसी दिन मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

पृथ्वी का झुकाव है असली वजह :-
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रीष्म संक्रांति किसी विशेष ग्रह-नक्षत्र के संयोग का परिणाम नहीं है, बल्कि पृथ्वी की धुरी के लगभग 23.5 डिग्री झुकाव का प्रत्यक्ष प्रभाव है। इसी झुकाव के कारण पृथ्वी पर ऋतुओं का निर्माण होता है। जून संक्रांति के समय उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर सबसे अधिक झुका होता है, जिससे सूर्य की किरणें अधिक सीधी और लंबे समय तक प्राप्त होती हैं।

भारत में कितना लंबा होगा दिन ?

भारत लगभग 8 से 37 डिग्री उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित है, इसलिए देश के अलग-अलग हिस्सों में दिन की अवधि अलग होगी। गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और भोपाल जैसे शहरों में दिन लगभग 13 घंटे 40 मिनट का रहेगा, जबकि दिल्ली और उससे उत्तर के क्षेत्रों में दिन लगभग 14 घंटे तक पहुंच सकता है।

क्या यही होगा साल का सबसे गर्म दिन ?
विशेषज्ञों के अनुसार जरूरी नहीं कि 21 जून ही वर्ष का सबसे गर्म दिन हो। पृथ्वी की सतह, महासागर और वायुमंडल सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को धीरे-धीरे संग्रहित करते हैं। इसी कारण अधिकतम तापमान कई सप्ताह बाद जून के अंत, जुलाई अथवा अगस्त में महसूस होता है। इस प्रभाव को वैज्ञानिक भाषा में “सीज़नल लैग” कहा जाता है।

खगोल विज्ञान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ग्रीष्म संक्रांति?
ग्रीष्म संक्रांति पृथ्वी की गतियों, ऋतु परिवर्तन, सौर ऊर्जा वितरण, मौसम एवं जलवायु विज्ञान के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी के आधार पर वैज्ञानिक पृथ्वी-सूर्य ज्यामिति की सटीक गणनाएं और मौसम संबंधी मॉडल विकसित करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से विशेष संबंध :-
संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। इस तिथि का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होता है और अनेक सभ्यताओं में इसे ऊर्जा, प्रकाश और संतुलन का प्रतीक माना जाता है
।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व :-
ग्रीष्म संक्रांति का महत्व केवल विज्ञान तक सीमित नहीं है। इंग्लैंड का प्रसिद्ध स्टोनहेंज स्मारक, पेरू का माचू पिच्चू, मेक्सिको का चिचेन इत्ज़ा तथा माल्टा का हागर किम मंदिर इस खगोलीय घटना से विशेष रूप से जुड़े हुए हैं। दुनिया के कई देशों में इस अवसर पर विशेष उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

21 जून 2026 की ग्रीष्म संक्रांति पृथ्वी की 23.5 डिग्री झुकी धुरी और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा का शानदार परिणाम है। यह दिन न केवल वर्ष का सबसे लंबा दिन होगा, बल्कि पृथ्वी और सूर्य के बीच चल रहे उस अद्भुत खगोलीय संतुलन की भी याद दिलाएगा, जो ऋतुओं, जलवायु और जीवन के पूरे चक्र को संचालित करता है।


