स्वतंत्रता दिवस समारोह 2024 में सहभागिता हेतु राष्ट्रीय सेवा योजना के चार स्वयंसेवको का चयन*, कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने दी शुभकामनाएँ
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना से स्वतंत्रता दिवस समारोह 2024 में सहभागिता हेतु चार स्वयंसेवको का चयन हुआ है। यह सभी स्वयं सेवक स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में होने वाले मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। स्वयं सेवकों की इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने सभी स्वयं सेवकों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यहाँ यह बताना उल्लेखनीय है कि *मेरी माटी मेरा देश* नामक कार्यक्रम के अंतर्गत *अमृत वाटिका* के निर्माण करने वाले दो उत्कृष्ट स्वयंसेवक आकाश कुमार तथा यशी श्रीवास्तव का चयन हुआ है। *माय भारत पोर्टल* पर पंजीकृत ऐसे छात्र जो *छात्र पुलिस अनुभवात्मक कार्यक्रम* में प्रतिभा किए हैं, उनमें से दो स्वयंसेवक कृष्ण कुमार मिश्रा तथा आकांक्षा राय और साथ ही इनके एक-एक अभिभावक राष्ट्रीय सेवा योजना की तरफ से स्वतंत्रता दिवस समारोह 2024 में सहभागिता करके का अवसर मिला है।
उक्त जानकारी देते हुए एनएसएस समन्वयक डॉ सत्यपाल सिंह ने बताया कि यह विश्वविद्यालय के स्वयं सेवकों के लिए बहुत उत्साहजनक है कि उनका चयन स्वतंत्रता दिवस में सहभागिता के लिए हुआ है। यह पहली बार है कि जब स्वतंत्रता दिवस पर स्वयं सेवकों को मुख्य कार्यक्रम के लिए दिल्ली बुलाया गया है।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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