गोरखपुर /इलाहाबाद ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-
‘शांति भंग’ की धाराओं के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट सख्त, अवैध हिरासत पर ₹25 हजार प्रतिदिन मुआवजे का रास्ता साफ
प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा “शांति भंग” की धाराओं के कथित दुरुपयोग पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है और बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए किसी भी व्यक्ति को जेल नहीं भेजा जा सकता।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने हेबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 317/2026, मंसूर अहमद उर्फ लल्लू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में 8 जून 2026 को यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता मंसूर अहमद का आरोप था कि 19 मार्च 2026 की रात प्रयागराज के खीरी थाना क्षेत्र की पुलिस उन्हें घर से उठाकर ले गई। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 170, 126 और 135 के तहत कार्रवाई की। बाद में उन्हें सहायक पुलिस आयुक्त एवं विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां कथित तौर पर पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई का अवसर दिए बिना उन्हें जेल भेज दिया गया।
हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में कहीं भी यह दर्ज नहीं था कि याचिकाकर्ता ने व्यक्तिगत बांड भरने से इनकार किया था। इसके बावजूद उन्हें आठ दिनों तक जेल में रखा गया।
अदालत ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन मानते हुए पीड़ित को दो लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया कि यह राशि संबंधित दोषी अधिकारी, तत्कालीन एसीपी के वेतन से वसूली जाएगी।
अदालत ने कहा कि पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में अधिकारियों को दी गई मजिस्ट्रेटी शक्तियों का कई मामलों में जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। कोर्ट के समक्ष आए आंकड़ों से पता चला कि प्रदेश के कई जिलों में हजारों नागरिकों को शांति भंग की धाराओं के तहत एक दिन से लेकर बीस दिनों तक जेल में रखा गया।
कोर्ट ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए नागरिकों की संवैधानिक स्वतंत्रता की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
• शांति भंग की कार्रवाई में अब केवल व्यक्तिगत बांड लिया जाएगा, जिसकी अधिकतम राशि 20 हजार रुपये होगी।
• किसी भी व्यक्ति से बाहरी जमानती की मांग नहीं की जाएगी।
• व्यक्तिगत बांड भरते ही संबंधित व्यक्ति को तत्काल रिहा करना होगा।
• यदि कोई व्यक्ति बांड भरने से इनकार करता है तो उसका ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड तैयार करना अनिवार्य होगा।
• बिना वैध कानूनी आधार के 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखने पर राज्य सरकार को 25 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा।
• मुआवजे की राशि दोषी अधिकारी या मजिस्ट्रेट के वेतन से वसूल की जाएगी।
• संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को आगामी 14 सितंबर 2026 तक आदेश के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


