अंग्रेजी विभाग में पियर टीचर्स का हुआ चयन
दीक्षारंभ में सहयोग के साथ-साथ सीनियर्स करेंगे जूनियर्स का मार्गदर्शन
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर की अंग्रेजी विभाग में सीनियर विद्यार्थियों का पियर टीचर के रूप में चयन किया गया। एम.ए प्रथम तथा द्वितीय सेमेस्टर में उत्कृष्ट प्रदर्शन तथा सी.जी.पी.ए के आधार पर पियर टीचर्स का चयन किया गया है। उक्त जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. अजय शुक्ला ने बताया कि पियर टीचर जूनियर्स के लिए हो रहे दीक्षारंभ में भी सहयोग करेंगे तथा समय-समय पर उनका मार्गदर्शन भी करेंगे। प्रोफेसर शुक्ला ने बताया कि पियर टीचिंग से छात्रों में नया दृष्टिकोण उत्पन्न होता है, विद्यार्थी शिक्षक से सीख के खुद का एक नया दृष्टिकोण विकसित करता है। पीयर टीचिंग से उनके सामाजिक संपर्क को भी बढ़ावा दिया जाता है जिससे वह बिना झिझक के अपनी बातें कह सके या दूसरों को समझा सके। पियर टीचिंग से छात्र खुद से नई चीज़ सीखते हैं तथा इससे उनके व्यक्तित्व विकास में मदद मिलती है।उन्होंने चयनित पियर टीचर्स को बधाई भी दी
ये हैं पियर टीचर्स: जाह्नवी सिंह, श्रेया मिश्रा, प्रकृति पटेल, आकांक्षा पांडे, आकर्षिका सिंह, आयुषी राव, साइमा अंसारी, शुधांस राय, कुशाग्र मिश्रा, आयुष्मान पांडे, अफ्फान राशिद
अंग्रेजी विभाग द्वारा पियर टीचर की चयन की प्रक्रिया सराहनीय प्रयास है, इससे विद्यार्थियों में व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ एक दूसरे को समझने तथा ज्ञान के आदान-प्रदान में भी सहयोग मिलता है। नैक मूल्यांकन में इस बात पर विशेष जोर दिया जाता है
प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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