15 दिन से भटकती रही महिला, सीओ ने दिया मुकदमा दर्ज करने का आदेश
गोला पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
ब्यूरो प्रभारी-वेद प्रकाश यादव
गोलाबाजार। योगी सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए “मिशन शक्ति” के तहत प्रतिबद्ध है। नीतियों का मुख्य फोकस अपराधों पर ‘जीरो टॉलरेंस’, जैसी भागीदारी बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाना है।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की प्रमुख महिला नीतियां और पहलें: सुरक्षा और जीरो टॉलरेंस: महिलाओं के प्रति अपराधों में सख्त कार्यवाही, और यौन अपराधों के त्वरित निपटारे में 98.60% सफलता के साथ यूपी को रोल मॉडल के रूप में स्थापित किया गया है। परंतु उपरोक्त सरकार की नीतियों को उनके ही गृह जनपद में जिम्मेदार पुलिस प्रशासन जीरो टॉलरेंस नीति को जीरो करना चाहते हैं जिसका जीता जागता उदाहरण गोरखपुर जनपद के गोला पुलिस का सामने आया है ।
क्या है पूरा मामला-
कोतवाली गोला क्षेत्र के ग्राम पटौहाँ निवासी मीना पत्नी रामनाथ उर्फ टसर को न्याय के लिए करीब 15 दिनों तक भटकना पड़ा। थाने में शिकायत देने के बावजूद सुनवाई न होने से परेशान पीड़िता ने अंततः मंगलवार को क्षेत्राधिकारी गोला को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई।
पीड़िता मीना के अनुसार घटना 19 जनवरी की रात लगभग 8:30 बजे की है। दो अज्ञात युवक बाइक से आकर उसके घर के सामने खड़े होकर शराब पीने लगे। जब मीना ने उन्हें घर के सामने शराब पीने से मना किया तो दोनों ने फोन कर अपने चार अन्य साथियों को बुला लिया। इनमें से एक की पहचान गोलू यादव पुत्र रणजीत यादव निवासी कोहरा के रूप में हुई है।
आरोप है कि सभी आरोपियों ने मिलकर मीना, उसके पति रामनाथ और उनकी तीन बेटियों के साथ गाली-गलौज की और लात-घूंसे से जमकर मारपीट की। मारपीट में मीना का हाथ टूट गया। इतना ही नहीं, आरोपियों द्वारा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद उसके पति ने थाना गोला में प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। लगातार चक्कर लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो मजबूर होकर मंगलवार को पीड़िता ने सीओ गोला से शिकायत की।
मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्राधिकारी गोला ने कोतवाली गोला को मुकदमा पंजीकृत कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसके बाद थाना गोला में संबंधित धाराओं में केस दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में सीओ के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई शुरू होने से क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिरकार पीड़िता को पहले ही दिन न्याय क्यों नहीं मिला।

