दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं व्राटिनो टेक्नॉलॉजी के बीच करार: साथ मिलकर उन्नत नक्षत्रशाला तकनीक पर काम करेंगे ।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय अपने छात्रो को आधुनिक नक्षत्रशाला तकनीक,नवाचार और अंतरिक्ष विज्ञान के शोध में दक्ष बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने दिनाँक 22 जुलाई 2024, सोमवार को नक्षत्रशाला उपकरणों ,एस्ट्रोनॉमी आउटरीच एवं स्पेस साइंस के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था व्राटिनो टेक्नोलॉजीज गोरखपुर, के साथ महत्वपूर्ण करार किया है। इसको लेकर दोनों संस्था के बीच समझौता ज्ञापन(एमवोयू) हो गया है।समझौता ज्ञापन के मुताबिक दोनों एक दूसरे को उन्नत नक्षत्रशाला प्रोजेक्शन मशीन ,नक्षत्रशाला प्रोजेक्शन स्क्रीन,ऑब्जर्वेटरी,3- डी तकनीक विकसित करने एवं खगोल विज्ञान के अनुसंधान में सहयोग करेंगे। समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. शांतनु रस्तोगी और व्राटिनो टेक्नोलॉजी, गोरखपुर की ओर से निदेशक श्री सचिन्द्र नाथ ने हस्ताक्षर किया है।
करार के बाद कुलपति प्रो. पूनम टंडन जिनका खगोलशास्त्र शोध क्षेत्र रहा है, उन्होंने बताया की व्राटिनो के विशेषज्ञों से विश्वविद्यालय के छात्र नक्षत्रशाला एवं वेधशाला विकसित करने की तकनीक सीखेंगे साथ ही साथ खगोल विज्ञान के शोध में व्राटिनो के साथ मिलकर काम भी करेंगे। इस तकनीक के विकास से भारत में चल रहे महंगे विदेशी नक्षत्रशाला उपकरण सस्ते दर पर स्वदेशी तकनीक से उपलब्ध होंग एवं वेधशाला के विकास से खगोल शास्त्र में रूचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए शोध का अवसर भी प्रदान करेगा । विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एव ख्यातिलब्ध भौतिकीशास्त्री प्रो. शांतनु रस्तोगी जो एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट भी रहें हैं उन्होंने जोर दिया की यह स्वदेशी तकनीक होगी जो सस्ती होगी इससे भारत में आबादी के हिसाब से नक्षत्रशाला की कमी को दूर किया जा सकेगा एवं आम जनमानष के लिए ज्यादा से ज्यादा नक्षत्रशाला बन पायंगे जिससे लोग ब्रह्माण्ड के रहस्य को समझने और जिज्ञासा पूरी कर सकेंगे।व्राटिनो के निदेशक सचिन्द्र नाथ ने बताया की व्राटिनो का उद्देश्य है भारत में वैज्ञानिक ज्ञान को उन्नयन में योगदान देना जिसके अंतर्गत प्रदेश में एक मात्र कार्य कर रही व्राटिनो श्री शंकर वेधशाला को विश्वविद्यालय के एस्ट्रोफिजिक्स के छात्रो के लिए हम उपलब्ध कराएंगे जहा छात्र-छात्राये अपने समय के उपलब्धता के अनुसार कार्य कर सकेंगे । इस मौक़े पर डॉo राजेश कुमार, डॉo प्रभुनाथ प्रसाद एव व्राटिनो के तकनीकी सहायक श्री उमेश कुमार उपस्थित रहेl
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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