किशोरियों और महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर, स्तन कैंसर एवं स्वास्थ प्रबंधन” विषयक कार्यशाला का आयोजन.
आज दिनांक 1.08.2024 को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में महिला अध्ययन केंद्र तथा मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता कार्यशाला जिसका विषय “किशोरियों और महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर, स्तन कैंसर एवं स्वास्थ प्रबंधन “ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को श्री भगवती प्रसाद शिक्षा स्मृति समिति,गोरखपुर तथा वी.एस फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित किया गया था।
इस कार्यशाला का आशय समाज में सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते आकड़ों के प्रति जागरूकता तथा रोकथाम के लिए उपाय रहा। कार्यक्रम का प्रारंभ कार्यक्रम की अध्यक्ष एवं प्रेरणा स्रोत प्रो पूनम टंडन माननीय कुलपति दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ किया गया जिसमे वरिष्ठ महिला स्वास्थ विशेषज्ञ डॉ अमृता जयपुरिया (गोरखपुर), डॉ रीना श्रीवास्तवा (गोरखपुर) , तथा मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ से डॉ फराह अर्शद जी रहीं l इस कार्यक्रम की संयोजिका प्रो.दिव्या रानी सिंह , निदेशक -महिला अध्ययन केंद्र ने अतिथियों का परिचय , समस्त सम्मानित पधारे अतिथियों का स्वागत किया तथा मंच पर उपस्थित अतिथियों को उत्तरीय तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया ।सर्वाइकल कैंसर तथा स्तन कैंसर में स्वास्थ प्रबंध पर जागरूक करते हुए उपस्थित महिला स्वास्थ चिकित्सकों द्वारा व्याख्यान दिया गया l डॉ रीना श्रीवास्तव जी ने अपने व्याख्यान में बताया कि HPV वैक्सीन सभी 9_26 वर्ष की लड़कियों को लगवाना चाहिए l गोडसिल -9 वैक्सीन 9 तरह की स्ट्रेन से बचाता है l डॉ अमृता जयपुरिया जी ने भी एच. पी .वी. वायरस के बारे बारे में चर्चा की एवं बताया कि वैक्सीन के विषय में जागरुकता की काफी कमी है तथा वैक्सीन का महंगा होना भी कम टीकाकरण का एक मुख्य कारण है , और भारत में अभी एक प्रतिशत से भी कम लोगों में एचपीवी का टीकाकरण हुआ है जो अत्यंत चिंतनीय है l वही मैक्स अस्पताल लखनऊ से आई डॉ फराह जी ने ब्रेस्ट कैंसर के कारण टेस्ट तथा बचने के उपाय के बारे में बताया l उन्होंने कहा कि कम क्रियाशीलता , शारीरिक व्यायाम की कमी ,अस्वास्थकारी भोजन ,तथा तनाव इसका मुख्य कारण है l कार्यक्रम अध्यक्ष माननीय कुलपति प्रो पूनम टंडन ने कार्यक्रम की उपयोगिता तथा समाज के हर वर्ग तक जागरूकता फैलाने और एचपीवी टीकाकरण को गति प्रदान करने में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को उल्लिखित किया साथ ही महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल का महिला स्वास्थ ख़ासकर सर्वाइकल कैंसर के बचाव के लिए टीकाकरण को कम से कम दाम में उपलब्ध करना और भारत में इस टीके के निर्माण को और गति देने जिससे सरकार इसे हर सरकारी अस्पताल में मुफ़्त में उपलब्ध करा सके के महामहिम के मंतव्य को स्पष्ट किया ।कार्यक्रम को सफल बनाने और सहयोग के लिए प्रो एस एस दास तथा संगीता मल्ल का विशेष योगदान रहा ।कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक ,छात्र ,एवं अन्य लोग के द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों का विस्तारपूर्वक चर्चा किए एवं इनसे जुड़े सभी तथ्यों को बताया एवं प्रश्नों का जवाब दियाl एवं इस कार्यक्रम में , प्रो नंदिता , प्रो सुधा यादव , प्रो अनुभूति दूबे ,प्रो राजवन्त राव ,प्रो उपेन्द्र नाथ त्रिपाठी ,श्रीमती पूजा रस्तोगी ,श्रीमती वंदना त्रिपाठी डॉ गीता सिंह,डॉ कुसुम रावत , डॉ अपरा त्रिपाठी, डॉ तूलिका मिश्रा प्रो अनुभूति दुबे, डॉ प्रीति , डॉ अनुपमा कौशिक , डॉ नीता सिंह , शोध छात्राएं , एवं छात्र छात्राएं भी उपस्थिति रहें l
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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