डीडीयूजीयू के डा. अम्बरीश चुने गए भारतीय विज्ञान अकादमी के असोसिएट
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग के सहायक आचार्य डा. अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव भारतीय विज्ञान अकादमी के असोसिएट चुने गए हैं। बंगलोर में स्थित भारतीय विज्ञान अकादमी, देश के तीन विज्ञान अकादमियों में से है। यह प्रतिवर्ष देश के शीर्ष युवा वैज्ञानिकों में लगभग 30 को एक असोसिएट के रूप में चुनती है जिनका कार्यकाल 3 वर्षों के लिए होता है। ये असोसिएट अकादमी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इनका चुनाव इनके शोध की गुणवत्ता एवं परिमाण के आधार पर किया जाता है। ज्ञात हो कि डा. श्रीवास्तव के 130 से ज़्यादा शोधपत्र विभिन्न अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं एवं इनकी छठवीं पुस्तक हाल ही में प्रकाशित हुई है। डा. श्रीवास्तव को पिछले वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, प्रयागराज द्वारा नासी युवा वैज्ञानिक पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।
बहराइच जिले में नानपारा क़स्बे के डा. अम्बरीश लखनऊ वि.वि. से पीएच.डी. के बाद गोरखपुर वि.वि. में नेशनल पोस्टडाक्टोरल फ़ेलो भी रह चुके हैं। उनकी इस उपलब्धि पर कुलपति समेत पूरे विश्वविद्यालय परिवार तथा उनके गाइड प्रो. नीरज मिश्र एवं मेंटर प्रो. सुग्रीव नाथ तिवारी ने शुभकामनायें दी हैं।
“युवा शिक्षकों की इस तरह की उपलब्धियाँ विश्वविद्यालय के लिए काफ़ी उत्साहजनक है। यह निश्चित ही विश्वविद्यालय की कीर्ति पूरे देश में फैलाता है।
-प्रो. पूनम टण्डन, कुलपति
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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