ब्यूरो प्रभारी-वेद प्रकाश यादव
गोला बाजार। गोला फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के सहारे लोन माफ कराने और बीमा की रकम हड़पने के संगठित षड्यंत्र में शामिल आरोपियों पर गोला पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में पुलिस ने इस मामले में फरार चल रही एक महिला अभियुक्ता को मंगलवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इससे पहले इस बहुचर्चित घोटाले में पांच पूर्व बैंक कर्मियों और चार महिलाओं को पुलिस जेल भेज चुकी है। सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 व 120बी भादंसं के तहत मुकदमा पंजीकृत है।
पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्ता की पहचान रोजी पत्नी आजाद, निवासी भटौली बाजार थाना बाँसगाँव, हाल निवासी कस्बा गोला स्थित बड़ी मस्जिद के पास के रूप में हुई है। अभियुक्ता लंबे समय से फरार चल रही थी, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई थी।
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फर्जी मौत दिखाकर लोन और बीमा की रकम हड़पी……
पुलिस के मुताबिक अभियुक्ता ने बैंक से लोन लेने के बाद कूटरचित मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया। इसके जरिए न केवल लोन की किस्तें जमा नहीं की गईं, बल्कि पहले से जमा रकम को भी धोखाधड़ी कर ‘डेथ पे अमाउंट’ के रूप में बैंक से निकलवा लिया गया। बैंक की तहरीर पर थाना गोला में इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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क्या था पूरा मामला…..
मामले की शुरुआत 28 अक्तूबर 2023 को हुई, जब भारत फाइनेंशियल इन्क्लूजन लिमिटेड इंडसइंड बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक दिनेश कुमार ने बैंक के 11 सेंटरों से लोन लेने वाली 19 महिला सदस्यों के मृत्यु प्रमाणपत्रों पर संदेह जताते हुए गोला थाने में मुकदमा दर्ज कराया। शुरुआती जांच में पूर्व शाखा प्रबंधक बृजेश कुमार सरोज और उनके पिता रामबली को मुख्य आरोपित बनाया गया था।
आरोप था कि बृजेश कुमार ने अन्य बैंक कर्मियों के साथ मिलकर समूह की महिला सदस्यों के पतियों को मृत दिखाया, जिससे न सिर्फ लोन माफ कराया गया बल्कि बीमा की रकम भी साजिशन हड़प ली गई। इस पूरे फर्जीवाड़े में करीब 6.44 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई थी।
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विवेचना में उठे सवाल, फिर हुआ खुलासा….
मामले की विवेचना के दौरान एसआई चंदन राय के स्थानांतरण के बाद जांच एसआई अजय कुमार को सौंपी गई। आरोप है कि विवेचना के दौरान उन्होंने मुख्य अभियुक्त पूर्व शाखा प्रबंधक का नाम केस से हटा दिया और केवल समूह की महिलाओं को आरोपी बना दिया। इसके बाद तीसरे विवेचक एसआई देवेंद्र सिंह यादव ने चार महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा। जब यह मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया तो पूरी विवेचना पर सवाल खड़े हो गए। बैंक कर्मियों को बचाने के आरोप सामने आने के बाद निवर्तमान एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने गोला थानेदार को स्वयं विवेचना सौंपी। नए सिरे से जांच में पूर्व शाखा प्रबंधक सहित अन्य बैंक कर्मियों की भूमिका स्पष्ट हुई, जिसके बाद गोला पुलिस ने पांच बैंक कर्मियों को गिरफ्तार कर पूरे घोटाले का पर्दाफाश किया।

