माथापच्ची के बाद पॉक्सो एक्ट में दर्ज किया केस.
गोरखपुर।नए कानून में आईपीसी की धारा 377 का विकल्प ही नहीं दिया गया है. यानी समलैंगिकता को अपराध नहीं माना गया है. ऐसा ही एक मामला तीन दिन पहले जिले के सहजनवा थाने में सामने आया, जहां 12 साल के बच्चे से कुकर्म की घटना हो गई तो पुलिस ने माथापच्ची शुरू कर दी.
नाबालिग होने की वजह से पुलिस ने इस केस में लैंगिग अपराध एक्ट (पॉक्सो) तहत केस दर्ज किया. लेकिन, अगर बालिग होता तो फिर केस ही नहीं दर्ज हो पाता.
एक से आईपीसी को खत्म कर नए केस में बीएनएस के तहत केस दर्ज किए जा रहे हैं. नए कानून में समलैंगिकता को अपराध नहीं माना गया है. 18 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग को माना गया है, उसके साथ इस तरह की घटना नहीं हो सकती है. अगर एक से अधिक लोग जबरन घटना करते हैं तो फिर दुष्कर्म की श्रेणी में आ जाएगा. कानून नया होने की वजह से अभी पुलिस वालों के पल्ले भी बहुत नहीं पड़ रहा है. इसी बीच सहजनवा इलाके के एक बालक के पिता ने पुलिस को सूचना दिया कि उसके साथ गलत घटना हुई है. पुलिस मौके पर पहुंची और जांच की तो घटना सही भी निकली. फिर केस दर्ज करने के लिए धारा पर माथापच्ची शुरू हुई. कानून के पन्ने पलटने के बाद तय किया गया कि पॉक्सो एक्ट में केस को दर्ज किया जाएगा. अब इसमें सजा भी अपराध के गंभीरता के आधार पर ही तय होगी.
अकेले पॉक्सो का पहला केस अभी तक इस एक्ट का इस्तेमाल नाबालिग के साथ होने वाले छेड़खानी, दुष्कर्म या फिर कुकर्म की घटना में किया जाता था. जिले का यह पहला केस है, जिसमें सिर्फ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. इसमें दो महीने में विवेचना पूरी करने का भी प्रावधान हैं, ताकि केस ट्रालय पर जल्दी जा सके.
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