बलिया के नरही थाना कांड के एसओ ने किया सरेंडर
गोला ।गोला थाना क्षेत्र के ग्राम भरसी निवासी पन्नेलाल कन्नौजिया पुत्र स्व बेचई बलिया के नरही थाना के एसओ रहे है।बीते 25 जुलाई को सादे कपड़े में एडीजी डीआईजी बड़े पैमाने पर हो रही धन उगाही का पर्दाफाश करने के लिए एक योजना के तहत छापे मारी की थी। जिसमें एसओ पन्नेलाल कन्नौजिया फरार चल रहे थे। रविवार की सुबह करीब 8 बजे ही बलिया एसओजी टीम उनके पैतृक गांव पहुची और स्थानीय थाना गोला की पुलिस भी पहुची और उनको सरेंडर करने का दबाव बनाने लगी करीब 6 घंटे की कड़ी मसक्कत के बाद पन्नेलाल कन्नौजिया बाइक से अपने घर पहुच कर एसओजी बलिया और गोला पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। सुत्रो की माने तो सुबह 8 बजे पहुची एसओजी टीम ने कन्नौजिया के पत्नी को उठाने लगी तब परिजन बेचैन हो कर पन्नेलाल से सम्पर्क किया। पन्नेलाल ने पुलिस टीम से अपने परिजन के फोन से बात कर कहा कि हमारे परिवार को नहीं उठाए मैं कुछ देर में आकर आपके सामने सरेंडर कर रहा हूं। पुलिस टीम उनकी बात का भरोसा कर उनका इंतजार करती रही ।पन्नेलाल सायं करीब 2 :30 बजे एक बाइक से घर पहुच कर पुलिस टीम के सामने सरेंडर कर दिया। बलिया एसओजी टीम पन्नेलाल को अपनी गाड़ी में बैठा कर बलिया के लिए रवाना हो गई।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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