नेत्र कुंभ की व्यवस्था संभालने निकली गोरखपुर की टीम.
144 साल बाद प्रयागराज में हो रहे महाकुंभ के अवसर पर नेत्र कुंभ का आयोजन किया गया है.
नेत्र कुंभ 2025 : सेवा, संकल्प और समर्पण का ऐतिहासिक संगम है.
महाकुंभ 2025 में अद्वितीय नेत्र सेवा का यह महायज्ञ है .
प्रयागराज के महाकुंभ 2025 में विश्व इतिहास के सबसे बड़े नेत्र चिकित्सा अभियान का आयोजन किया गया है। इस भव्य नेत्र कुंभ में 5 लाख लोगों की नेत्र जांच, 3 लाख जरूरतमंदों को निशुल्क चश्मा वितरण,और 50,000 मरीजों के मुफ्त नेत्र ऑपरेशन का लक्ष्य रखा गया है।
यह दिव्य आयोजन नागवासुकी, सेक्टर-5 में 10 एकड़ भूमि पर किया गया है, जिसमें सक्षम संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका है।
नेत्र कुंभ 2025: विश्व के सबसे बड़े नेत्र चिकित्सा अभियान की झलक
उद्घाटन : 5 जनवरी 2025
अवधि : 12 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 (50 दिवसीय सेवा महायज्ञ)
10 फरवरी से लेकर 16 फरवरी तक नेत्र कुंभ का संचालन तथा इसमें सहयोग गोरख प्रांत के सदस्यों को दिया गया है प्रांत अध्यक्ष डॉ शिव शंकर शाही ने बताया कि जब से कुंभ का आयोजन हुआ है तब से हम लोग सतत प्रयास कर रहे हैं कि नेत्र कुंभ में किसी तरह की कोई कमी ना पड़े .जब वहां से आधुनिक मशीन मांगी जाती है तो आधुनिक मशीन पहुंचाई जाती है जब वहां पर चिकित्सक तथा पैरा मेडिकल स्टाफ की आवश्यक्ता होती है तो उसे भी पूरा किया जाता है. आज 27 कार्यकर्ता गोरखपुर के प्रयागराज जा रहे हैं जो नेत्र कुंभ के संचालन में मदद करेंगे .
आज शाम को सावित्री हॉस्पिटल दिलेजाकपुर ,शाही ग्लोबल हॉस्पिटल तारामंडल गोरखपुर तथा शंकर नेत्र चिकित्सालय से 27 कार्यकर्ता वहां की व्यवस्था में सहयोग करने के लिए रवाना हो रहे हैं .इन लोगों के साथ सक्षम गोरक्ष प्रांत के सचिन तथा गोरक्ष प्रांत नेत्र कुंभ प्रभारी श्री रमाकांत जी जा रहे हैं.
प्रांत अध्यक्ष डॉ शिव शंकर शाही ने कहा की नेत्र कुम्भ को आयोजन हमारे जीवन में पहली बार आया है अब महाकुंभ फिर 144 साल बाद आएगा इसलिए इस नेत्र कुम्भ के आयोजन में हम जितना भी मदद कर सकते हैं तन मन और धन से कोशिश करके कर रहे हैं . यह मौका मेरी जिंदगी में मुझे पहली बार मिला है इसलिए इसमें जितना सहयोग हो सके उतना करने की कोशिश कर रहा हूं .डॉक्टर शाही ने कहा कि मैं अपने को बहुत ही भाग्यशाली महसूस कर रहा हूं कि इस तरह की मानवता की सेवा जो साधु संतों, सनातन धर्मियों तथा धरती पर भगवान के रूप में विचरण करने वाले महात्माओं की करने का मौका मिला है. यह सेवा बार-बार नहीं मिलती है .इस तरह और इतना बड़ा चिकित्सा शिविर विश्व में पहली बार लग रहा है जो अपने आप में एक कीर्तिमान है.