आईजीआरएस संदर्भों सहित अन्य प्रार्थना पत्र का ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने किया समीक्षा.
एक व्यक्ति द्वारा दिए गए एक ही संदर्भ में कई प्रार्थना में से एक प्रार्थना पत्र का किया जाए निस्तारण बाकी अन्य प्रार्थना पत्र को किया जाए खारिज_ सदर तहसीलदार
गोरखपुर। सदर तहसील सभागार में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर मृणाली अविनाश जोशी के अध्यक्षता में आईजीआरएस सहित अन्य प्रार्थना पत्र की समीक्षा बैठक आयोजित किया गया ज्वाइंट मजिस्ट्रेट) एसडीएम सदर तहसील सदर तहसील के समस्त अधिकारियों कानूनगो और लेखपाल से कहा कि सदर तहसील के चौमुखी विकास के लिए अपना अहम योगदान दें जिससे सदर तहसील प्रदेश में प्रथम स्थान पर आ सके। संदर्भों का निस्तारण करने के लिए लेखपाल अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए प्राप्त प्रार्थना पत्र का निस्तारण मौके पर जाकर ही निस्तारित करने का कार्य करें जिस किसी भी संदर्भ को निस्तारित करने में किसी प्रकार की शिकायती प्रार्थना पत्र किसी के खिलाफ न आने पाए यह तभी संभव है जब अपने क्षेत्र में जाकर मौके पर मामले का निस्तारण करेंगे कोई भी लेखपाल किसी भी आवेदक को अपना चक्कर न लगवाए शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी सदर तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह ने कहा कि आइजीआरएस आय जाति निवास प्रमाण पत्रों सहित अन्य शिकायती पत्रों का निस्तारण समयबद्ध तरीके से किया जाए किसी भी प्रार्थना पत्र का निस्तारण खानापूर्ति करके ना किया जाए केवल कागजों पर निस्तारण नहीं दिखाई देना चाहिए जमीनी स्तर पर मामले का निस्तारण होना चाहिए।
आय जात निवास प्रमाण पत्रों का निस्तारण समयबद्ध 5 दिन में निर्धारित करने का समय निर्धारित है लेकिन 3 दिन के अंदर इन प्रमाण पत्रों का निस्तारण किया जाए जिससे आवेदक को तहसील का चक्कर ना लगाना पड़े समय रहते इन प्रमाण पत्र का आवेदक सदउपयोग कर सके। सदर तहसीलदार ने कहा कि प्राप्त शिकायत का निस्तारण मुख्यमंत्री संदर्भ, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन संदर्भ, जिलाधिकारी /एसएसपी संदर्भ संपूर्ण समाधान दिवस, ऑनलाइन संदर्भ, पीजी पोर्टल संदर्भ, महिला हेल्प डेस्क आय जात निवास प्रमाण पत्रों सहित अन्य संदर्भ के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त कर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कहा कि निस्तारण की गुणवत्ता व समय सीमा समयबद्ध सुनिश्चित हो इसमें लापरवाही कत्तई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आईजीआरएस पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों पर महज औपचारिकता के तहत निस्तारण न करें, बल्कि उसे गंभीरता से लेकर शिकायतकर्ता की संतुष्टि के मुताबिक निस्तारण करें। सदर तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह ने कहा कि अगर एक ही आवेदक भिन्न-भिन्न नाम से शिकायत किया जाता है तो जांच में स्पष्ट होता है कि एक ही आवेदक द्वारा बार-बार एक ही मामले में आवेदन किया जा रहा है तो ऐसे आवेदक के एक मामले को गुणवत्ता युक्त सही तरीके से जांच कर संदर्भ को निस्तारित करें बाकी अन्य सभी प्रार्थना पत्रों का विस्तार पूर्वक विवरण देते हुए खारिज करने का कार्य करें जिस किसी प्रकार का कन्फ्यूजन किसी के अंदर ना रहे शिकायतकर्ता से फोन पर भी संपर्क करें जो लेखपाल शिकायतों के प्रति गंभीर नहीं है और शिकायत डिफाल्टर की श्रेणी में जा रही हैं ऐसे लेखपाल को दण्डित किया जाएगा। एक शिकायतकर्ता की बार-बार शिकायत आती है तो पता लगाया जायेगा की उसके मामले का समाधान क्यों और किन कारणों से निस्तारण नहीं किया जा रहा है ऐसे लेखपाल को चिन्हित किया जाएगा।
।बैठक में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर मृणाली अविनाश जोशी सदर तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह नायब तहसीलदार अरविंद नाथ पांडे नायब तहसीलदार हिमांशु सिंह नायब तहसीलदार जाकिर हुसैन सहित समस्त कानूनगो लेखपाल संबंधित पटल के प्रभारी मौजूद रहे।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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