संभल बवाल के फरार आरोपियों के करीबी पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस इनके जरिये आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी है। आरोपियों के 200 से ज्यादा करीबी और संपर्क में रहने वाले लोगों के मोबाइल का सीडीआर पुलिस ने निकलवाया है। जिससे पता चल सके कि यह लोग कहां बातचीत कर रहे हैं। साथ ही उनके बैंक खातों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।24 नवंबर की सुबह संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान जमकर बवाल हुआ था, जिसमें पांच लोगों की जान चली गई थी। अब तक इस मामले में 12 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। तीन महिला समेत 41 आरोपी जेल भेज में बंद हैं। अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें यूपी के अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार तक दबिश दे चुकी हैं।इसके बाद भी फरार आरोपियों के बारे में पुलिस को पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल का सीडीआर निकलवाया तो पता चला कि घटना के बाद से आरोपी मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल भी निकलवाई, जिससे पता चल सके कि आरोपियों ने कहीं डेबिट या क्रेडिट कार्ड का तो इस्तेमाल नहीं किया। इसके बावजूद सफलता नहीं मिल पाई। अब पुलिस ने बवाल के आरोपियों के करीबियों का सीडीआर या काॅल डिटेल रिकाॅर्ड निकलवाया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि 200 से ज्यादा लोगों का सीडीआर निकलवाकर जांच की जा रही है कि आरोपी उनके संपर्क में तो नहीं हैं। इसके अलावा खुफिया तंत्र की ओर से भी आरोपियों के करीबी और संपर्क में रहने वाले लोगों की निगरानी की जा रही है।
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- एनडीआरएफ ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए आपदा प्रबंधन के गुर *आपातकाल में बचाव और राहत का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण।* संवाददाता – एस.पी. सिंह सहजनवा, (गोरखपुर)। 44वीं यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज, सहजनवा में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-157 के नौवें दिन कैडेट्स को आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 11वीं एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से कैडेट्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षित ढंग से सहायता एवं बचाव करने के प्रभावी तरीके सिखाए। कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी के अनुरोध पर, एनडीआरएफ के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में निरीक्षक दीपक कुमार मंडल एवं उनकी टीम ने प्रशिक्षण का संचालन किया। विशेषज्ञों ने कैडेट्स को बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, सूझबूझ और सही तकनीक के साथ कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), ट्रॉमा मैनेजमेंट, हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से किस प्रकार अस्थायी बचाव उपकरण एवं स्ट्रेचर तैयार कर घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। एनडीआरएफ की टीम ने कैडेट्स को आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने का संदेश दिया। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न बचाव तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर कैंप कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल रमन तिवारी ने 11वीं एनडीआरएफ की टीम के उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं सराहनीय योगदान के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा कैडेट्स के लिए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और जीवनोपयोगी बताया।
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