विजय कुमार श्रीवास्तव
गोरखपुर, दिनांक: 4 फरवरी 2026 सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) पक्कीबाग, गोरखपुर में बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य एवं सफलता की कामना हेतु
‘आशीर्वाद समारोह’ का भव्य एवं प्रेरणादायक आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनुभूति दुबे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), तारापुर (महाराष्ट्र) के वैज्ञानिक एवं विद्यालय के पुरातन छात्र श्री ओमकार नाथ साहू की उपस्थिति रही।

प्रोफेसर अनुभूति दुबे ने छात्रों से भारतीय शिक्षा दर्शन की ‘पंचकोश अवधारणा’ (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनंदमय कोश) पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए इन पाँचों कोशों पर संतुलित कार्य आवश्यक है। आगामी बोर्ड परीक्षाओं में तनाव मुक्त रहकर सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए मनोवैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करें। धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी हैं।”

विशिष्ट अतिथि श्री ओमकार नाथ साहू ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा, “सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। विद्यालय के संस्कारों, शिक्षकों के मार्गदर्शन और निरंतर अनुशासित प्रयासों ने मुझे वैज्ञानिक के प्रतिष्ठित पद तक पहुँचाया। मेहनत और लगन कभी व्यर्थ नहीं जाती।” एक पूर्व छात्र को अपने बीच पाकर विद्यार्थियों का उत्साह दोगुना हो गया। विद्यार्थियों ने अतिथिगण से अपनी जिज्ञासाओं पर प्रश्न भी पूछे, जिनका समाधान अतिथियों के द्वारा हुआ।

विद्यालय के सीबीएसई परीक्षा प्रमुख आचार्य श्री गिरीश चन्द्र पाण्डेय जी ने परीक्षा से संबंधित भारतीयों पर प्रकाश डाला उन्होंने सभी परीक्षार्थियों को धैर्यपूर्वक परीक्षा में सम्मिलित होने की शुभकामनाएँ दीं।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। अतिथि परिचय प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने कराया। आभार ज्ञापन प्रथम सहायक श्रीमती रुक्मिणी उपाध्याय ने किया संचालन आचार्य एस. एन. कुशवाहा ने किया।

इस अवसर पर विद्यालय के गृह परीक्षा प्रमुख श्री अविनाश श्रीवास्तव, विद्यालय के इण्टर के प्रभारी श्री रामकेवल शर्मा जी बोर्ड परीक्षा देने वाले समस्त छात्र एवं विद्यालय परिवार उपस्थित रहा। कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं स्मरणीय रहा।



