वेद प्रकाश यादव बड़हलगंज, गोरखपुर । गोरखपुर। जिले के बड़हलगंज स्थित एक निजी अस्पताल पर गंभीर लापरवाही और धोखाधड़ी का आरोप लगा है। महराजगंज जिले के रहने वाले हफीजुर्रहमान ने आरोप लगाया है कि किडनी की पथरी के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने बिना जानकारी दिए उनकी दाहिनी किडनी निकाल दी। मामले में अब तक […]
वेद प्रकाश यादव बड़हलगंज, गोरखपुर ।
गोरखपुर। जिले के बड़हलगंज स्थित एक निजी अस्पताल पर गंभीर लापरवाही और धोखाधड़ी का आरोप लगा है।
महराजगंज जिले के रहने वाले हफीजुर्रहमान ने आरोप लगाया है कि किडनी की पथरी के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने बिना जानकारी दिए उनकी दाहिनी किडनी निकाल दी। मामले में अब तक कार्रवाई न होने से पीड़ित ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से न्याय की मांग की है।
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प्रार्थी हफीजुर्रहमान पुत्र मसीउल्लाह, ग्राम अहिरौली थाना भिटौली, जनपद महराजगंज के निवासी हैं। उनके अनुसार दाहिनी किडनी में 18 मिमी की पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए वे बड़हलगंज स्थित जोहरा हॉस्पिटल में डॉ. मोहम्मद अयूब के पास गए थे। उन्हें 21 अक्टूबर 2022 को भर्ती किया गया और 27 अक्टूबर 2022 को ऑपरेशन के बाद छुट्टी दे दी गई।
पीड़ित ने बताया कि बचपन में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। ऑपरेशन के दो महीने बाद वे रोज़गार के लिए कुवैत चले गए, जहां उनकी तबीयत लगातार खराब रहती थी और इलाज चलता रहा।
स्वास्थ्य बिगड़ने पर वे 6 सितंबर 2025 को कुवैत से घर लौटे और डॉक्टर की सलाह पर गोरखपुर के एक डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच कराई। जांच रिपोर्ट में दाहिनी किडनी गायब होने की जानकारी मिली। संदेह दूर करने के लिए उन्होंने कई स्थानों पर जांच कराई, जिनमें शामिल हैं:
1 – आयुष्मान डायग्नेस्टिक सेंटर, गोरखपुर
2 – फैमिली अल्ट्रासाउंड सेंटर, महराजगंज
3 – शकुंतला डायग्नोस्टिक सेंटर, गोरखपुर
3 – लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर, गोरखपुर
4 – सभी रिपोर्टों में दाहिनी किडनी न होने की पुष्टि हुई।
जिम्मेदारों को दी सूचना, फिर भी कार्रवाई नहीं
पीड़ित के अनुसार 13 जनवरी 2026 को उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी गोरखपुर को शिकायत पत्र दी। जहां एमआरआई कराने की सलाह दी गई। बाद में कराए गए एमआरआई में भी दाहिनी किडनी नहीं दिखाई दी। इसके बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पीड़ित ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोरखपुर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों व न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।
यह मामला निजी अस्पतालों में उपचार की पारदर्शिता, मरीज की सहमति और चिकित्सकीय नैतिकता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह न केवल आपराधिक कृत्य बल्कि चिकित्सा व्यवस्था पर गहरा आघात माना जाएगा।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कार्रवाई करता है।